June 29, 2026

पश्चिम बंगाल में यूसीसी पर पहली बड़ी सियासी जंग

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पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार आज विधानसभा में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक पेश कर सकती है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के महज दो महीने बाद आने वाला यह विधेयक सरकार के सबसे बड़े चुनावी वादों में से एक माना जा रहा है। इसके साथ ही विधानसभा का बजट सत्र भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों के बीच पहली बड़ी वैचारिक टक्कर का मंच बनने जा रहा है।

प्रस्तावित यूसीसी विधेयक का उद्देश्य विवाह, तलाक, गोद लेने, उत्तराधिकार और संपत्ति के बंटवारे जैसे नागरिक मामलों के लिए सभी धर्मों पर समान कानूनी ढांचा लागू करना है। भाजपा का कहना है कि सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून संविधान की समानता की भावना को मजबूत करेगा और अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की व्यवस्था को समाप्त करेगा।

दूसरी ओर, तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट इस विधेयक का पुरजोर विरोध करने की तैयारी में हैं। विपक्ष का तर्क है कि इतने व्यापक सामाजिक और धार्मिक प्रभाव वाले कानून को लागू करने से पहले सभी समुदायों, विशेषज्ञों और संबंधित पक्षों से व्यापक संवाद और सहमति आवश्यक है। विपक्ष का यह भी कहना है कि विधेयक संवैधानिक सुरक्षा और सांस्कृतिक विविधता से जुड़े कई अहम सवाल खड़े करता है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यूसीसी पर होने वाली बहस केवल एक विधेयक तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह पश्चिम बंगाल की नई राजनीतिक दिशा तय करने वाली बड़ी परीक्षा भी साबित हो सकती है। सरकार इसे अपने जनादेश और चुनावी वादे को पूरा करने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे जनता और विभिन्न समुदायों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मुद्दा बनाकर सदन के भीतर और बाहर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम कर रहा है।