मनरेगा बदला, अब राज्यों पर बढ़ेगा हजारों करोड़ का बोझ!
देश की सबसे बड़ी ग्रामीण रोजगार योजना मनरेगा (MGNREGA) अब 1 जुलाई 2026 से विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानी VB-G RAM G के रूप में लागू होने जा रही है। हालांकि नई योजना में ग्रामीण परिवारों को 100 की जगह 125 दिनों के रोजगार की गारंटी देने का दावा किया गया है, लेकिन इसकी नई फंडिंग व्यवस्था ने कई राज्यों की चिंता बढ़ा दी है। बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों ने केंद्र सरकार से लागत साझा करने के नए फॉर्मूले पर पुनर्विचार करने की मांग की है।
आंकड़ों के मुताबिक, यदि 125 दिनों का रोजगार पूरी तरह लागू किया जाता है तो बिहार पर करीब 15,939 करोड़ रुपये, मध्य प्रदेश पर 20,037 करोड़ रुपये और झारखंड पर 9,293 करोड़ रुपये तक की वित्तीय जिम्मेदारी आ सकती है। इसके अलावा कई राज्यों ने मनरेगा मजदूरी दर को बाजार दर से कम बताते हुए इसे बढ़ाने की मांग की है। राज्यों ने मजदूरी और सामग्री भुगतान में लगातार हो रही देरी तथा कृषि के व्यस्त मौसम में 60 दिनों तक काम रोकने जैसे प्रावधानों पर भी सवाल उठाए हैं।
नई योजना को लेकर केंद्र सरकार और राज्यों के बीच वित्तीय जिम्मेदारियों को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर सरकार इसे ग्रामीण रोजगार को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं कई राज्य अतिरिक्त आर्थिक बोझ को लेकर चिंतित हैं। ऐसे में 1 जुलाई से लागू होने वाली VB-G RAM G योजना का असर न केवल राज्य सरकारों के बजट पर पड़ेगा, बल्कि ग्रामीण रोजगार व्यवस्था और विकास योजनाओं पर भी दूरगामी प्रभाव देखने को मिल सकता है।
