खनिजों से मालामाल, फिर भी पिछड़ा क्यों रहा झारखंड?
रांची में 1,042 नवनियुक्त शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने झारखंड के विकास मॉडल पर बड़ा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वर्षों तक राज्य को केवल खनिज संपदा के दोहन का केंद्र समझा गया, लेकिन यहां के लोगों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अपेक्षित प्रयास नहीं हुए। उन्होंने शिक्षा को राज्य के समग्र विकास की सबसे बड़ी कुंजी बताया।
हेमंत सोरेन ने देश के विकसित राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि वे शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़े, इसलिए विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचे। उनका मानना है कि यदि झारखंड में भी लंबे समय से शिक्षा पर पर्याप्त ध्यान दिया गया होता, तो राज्य आज कहीं अधिक प्रगति कर चुका होता। उन्होंने स्थानीय युवाओं को अवसर देकर आत्मनिर्भर झारखंड बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने सामाजिक सौहार्द पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि नफरत और समाज को बांटने वाली सोच से बचना होगा तथा शिक्षकों की जिम्मेदारी है कि वे विद्यार्थियों में भाईचारे, संवैधानिक मूल्यों और सकारात्मक सोच को बढ़ावा दें। सरकार का उद्देश्य शिक्षा को मजबूत कर राज्य के विकास को नई गति देना है।
