सर्च न्यूज: सच के साथ: भारत के विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) Sibi George इन दिनों अंतरराष्ट्रीय मीडिया में चर्चा का बड़ा चेहरा बन गए हैं। नॉर्वे की राजधानी ओस्लो में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान जब एक विदेशी पत्रकार ने भारत में प्रेस फ्रीडम, अल्पसंख्यक अधिकार और मानवाधिकारों को लेकर तीखे सवाल उठाए, तब भारतीय अधिकारी ने बेहद शांत लेकिन सख्त अंदाज़ में जवाब देकर पूरी बहस का रुख बदल दिया।
भारतीय कूटनीति की इस तेज़ और आत्मविश्वासी शैली ने सोशल मीडिया पर भी जबरदस्त प्रतिक्रिया पैदा कर दी है। कई लोगों ने इसे “भारत की नई वैश्विक बॉडी लैंग्वेज” बताया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, नॉर्वे के अखबार की पत्रकार ने सवाल किया कि दुनिया भारत पर इन मुद्दों को लेकर भरोसा क्यों करे। इस पर Sibi George ने सीधे जवाब देते हुए कहा कि भारत को समझने के लिए चुनिंदा NGO रिपोर्ट्स नहीं, बल्कि उसके लोकतांत्रिक ढांचे, संविधान और संस्थाओं को देखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि कई विदेशी विश्लेषक भारत को अधूरी और एकतरफा जानकारी के आधार पर आंकते हैं।
कौन हैं सिबी जॉर्ज?
केरल के कोट्टायम से आने वाले Sibi George 1993 बैच के भारतीय विदेश सेवा (IFS) अधिकारी हैं। वे जापान, कुवैत और स्विट्ज़रलैंड में भारत के राजदूत रह चुके हैं। उन्होंने वॉशिंगटन, तेहरान, रियाद, इस्लामाबाद और दोहा जैसे रणनीतिक शहरों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं।
विदेश मंत्रालय में उनके लंबे अनुभव और कूटनीतिक शैली को काफी प्रभावशाली माना जाता है। उन्हें 2014 में भारतीय विदेश सेवा में उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रतिष्ठित SK Singh Award भी मिल चुका है।
सोशल मीडिया पर क्यों छाए हुए हैं?
ओस्लो की इस प्रेस ब्रीफिंग का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। कई यूज़र्स ने कहा कि भारतीय अधिकारियों का यह आत्मविश्वास दिखाता है कि अब भारत वैश्विक मंच पर रक्षात्मक नहीं बल्कि आक्रामक और स्पष्ट जवाब देने की नीति अपना रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि हाल के वर्षों में भारत ने अंतरराष्ट्रीय आलोचनाओं का जवाब देने की अपनी शैली बदली है। अब भारतीय अधिकारी सिर्फ सफाई नहीं देते, बल्कि सीधे तथ्यों और संवैधानिक ढांचे के आधार पर जवाब रखते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर दिखा दिया कि वैश्विक मंच पर भारत की कूटनीतिक भाषा अब पहले से कहीं ज्यादा तेज़, आत्मविश्वासी और प्रभावशाली हो चुकी है।