पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में बवाल: सड़कों पर उतरे हजारों लोग, पुलिस से हिंसक झड़पें, 15 की मौत के बाद बढ़ा तनाव
मुज़फ्फराबाद/इस्लामाबाद: पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) एक बार फिर उथल-पुथल के दौर से गुजर रहा है। चुनाव से पहले विधानसभा में 12 आरक्षित सीटों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है। हजारों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं और कई जगहों पर सुरक्षा बलों के साथ हिंसक झड़पें हुई हैं। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक अब तक कम से कम 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें आम नागरिक और सुरक्षा कर्मी दोनों शामिल हैं।
आखिर क्यों भड़का यह आंदोलन?
विवाद की जड़ आगामी विधानसभा चुनाव हैं। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की विधानसभा में 12 सीटें उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो इस क्षेत्र में रहते ही नहीं हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन सीटों पर केवल स्थानीय निवासियों को चुनाव लड़ने का अधिकार मिलना चाहिए।
इसी मांग को लेकर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने बड़े मार्च का आह्वान किया। प्रशासन ने संगठन पर देशद्रोह और शांति भंग करने के आरोप लगाते हुए उसे प्रतिबंधित कर दिया, लेकिन इसके बावजूद हजारों लोग सड़कों पर उतर आए।
मुज़फ्फराबाद की ओर बढ़ता जनसैलाब
स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार, 10 हजार से अधिक प्रदर्शनकारी मुज़फ्फराबाद की ओर कूच कर रहे हैं। कई जिलों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच आमना-सामना हुआ, जिसके बाद हालात और बिगड़ गए।
कई स्थानों पर इंटरनेट सेवाएं प्रभावित होने और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियों की भी खबरें सामने आई हैं। मानवाधिकार संगठनों ने बल प्रयोग और कार्रवाई पर चिंता जताई है।
बंद बाजार, खाली सड़कें और बढ़ती बेचैनी
राजधानी मुज़फ्फराबाद समेत कई इलाकों में दुकानें बंद हैं और आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। कुछ व्यापारियों का कहना है कि वे आंदोलन के समर्थन में स्वेच्छा से हड़ताल कर रहे हैं, जबकि अन्य लोग सुरक्षा कारणों से अपने प्रतिष्ठान नहीं खोल रहे।
शहरों में पुलिस गश्त बढ़ा दी गई है और प्रशासन किसी भी नई हिंसा को रोकने के लिए सतर्क है।
कश्मीर पर फिर केंद्रित हुई दुनिया की नजर
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब कश्मीर का मुद्दा पहले से ही भारत और पाकिस्तान के बीच दशकों पुराने विवाद का केंद्र बना हुआ है। मौजूदा विरोध प्रदर्शन ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के भीतर राजनीतिक प्रतिनिधित्व, लोकतांत्रिक अधिकारों और स्थानीय असंतोष को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन और प्रदर्शनकारियों के बीच कोई समाधान निकल पाएगा, या फिर यह आंदोलन आने वाले दिनों में और बड़ा रूप ले सकता है।
