June 20, 2026

RSS की फंडिंग पर उठे सवाल, सियासत गरमाई

0dbtaulc_dalwai_625x300_18_June_26

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की फंडिंग और वित्तीय पारदर्शिता को लेकर देश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद हुसैन दलवई ने RSS की आय के स्रोत, कानूनी स्थिति और वित्तीय संचालन को लेकर स्वतंत्र जांच की मांग की है। उनका कहना है कि देश के सबसे प्रभावशाली संगठनों में शामिल RSS को भी अपनी वित्तीय गतिविधियों के बारे में सार्वजनिक जवाबदेही दिखानी चाहिए।

यह बहस तब तेज हुई जब कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियंक खड़गे ने RSS प्रमुख मोहन भागवत को पत्र लिखकर संगठन की कानूनी स्थिति, फंडिंग स्रोत, खर्च, संपत्तियों और कर अनुपालन से जुड़ी जानकारी मांगी। खड़गे का तर्क है कि जिस तरह ट्रस्ट, एनजीओ और अन्य सार्वजनिक संस्थाओं से पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है, उसी तरह बड़े सामाजिक और वैचारिक संगठनों को भी जवाबदेह होना चाहिए।

हुसैन दलवई ने दावा किया कि RSS को मिलने वाले धन और उसके उपयोग को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म, मंदिरों और अन्य संस्थानों के नाम पर जुटाए गए धन के उपयोग की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने विदेशी स्रोतों से संभावित फंडिंग की आशंकाओं की भी जांच कराने की मांग की। हालांकि, उन्होंने इस बात पर संदेह जताया कि मौजूदा सरकार इस तरह की जांच शुरू करेगी।

वहीं RSS प्रमुख मोहन भागवत ने इन आरोपों और मांगों को राजनीतिक प्रेरित बताते हुए खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि RSS एक खुला संगठन है, सरकारी धन पर निर्भर नहीं है और इसलिए उस पर ऐसे नियम लागू नहीं होते जिनकी मांग की जा रही है। इस मुद्दे ने एक बार फिर देश में राजनीतिक संगठनों, वैचारिक संस्थाओं और सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता को लेकर बहस छेड़ दी है, जिसके आने वाले दिनों में और तेज होने की संभावना है।

You may have missed