June 1, 2026

“साइकिल शर्म नहीं, शान है”- पूर्व DIG राजीव रंजन सिंह

IMG-20260531-WA0000

बच्चों को विद्यालय साइकिल से भेजें, हर मुख्य सड़क पर बने अलग साइकिल ट्रैक – राजीव रंजन सिंह की अपील

सर्च न्यूज: सच के साथ: कोल्हान के पूर्व DIG श्री राजीव रंजन सिंह ने अभिभावकों से आग्रह किया है कि वे बच्चों को स्कूल, कॉलेज एवं व्यक्तिगत आवागमन के लिए साइकिल के प्रयोग हेतु प्रेरित करें।

श्री सिंह ने कहा, _”साइकिल के नियमित प्रयोग से बच्चों का शरीर मजबूत होता है, आत्मबल बढ़ता है और आंतरिक शक्ति में वृद्धि होती है। साथ ही पेट्रोल का खर्च घटता है और पर्यावरण प्रदूषण कम होता है, जो सीधे तौर पर देशहित में है।”_

उन्होंने यूरोप का उदाहरण देते हुए कहा, _”नीदरलैंड्स, डेनमार्क, जर्मनी जैसे विकसित देशों में साइकिल चलाना गर्व की बात है और स्टेटस सिंबल माना जाता है। इसके विपरीत हमारे देश में लोग साइकिल चलाने से हिचकते हैं, हीन महसूस करते हैं। इस मानसिकता को अब बदलना होगा।”_श्री सिंह ने स्मरण कराया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी देशवासियों से पेट्रोल बचाने की अपील कर चुके हैं। साइकिल का प्रयोग इस दिशा में एक व्यावहारिक और प्रभावी कदम है।

सरकार से मांग: उन्होंने जमशेदपुर जिला प्रशासन से मांग की कि शहर की सभी मुख्य सड़कों पर साइकिल के लिए अलग, सुरक्षित पाथवे/लेन का निर्माण प्राथमिकता पर किया जाए, ताकि बच्चे एवं नागरिक निर्भीक होकर साइकिल चला सकें।

साइकिल के 5 बड़े फायदे

1. स्वास्थ्य लाभ:मजबूत शरीर, बढ़ा आत्मबल, बेहतर रोग-प्रतिरोधक क्षमता

2. आर्थिक बचत: पेट्रोल-डीजल का खर्चा शून्य, हर परिवार की मासिक बचत

3. पर्यावरण संरक्षण: प्रदूषण मुक्त शहर, स्वच्छ हवा, कार्बन उत्सर्जन में कमी

4. राष्ट्रीय हित:ऊर्जा बचत, विदेशी मुद्रा की बचत, PM मोदी की अपील का अनुपालन

5. सामाजिक बदलाव: विकसित देशों की तरह साइकिल को स्टेटस सिंबल बनाएं, हीन भावना समाप्त करें

दुनिया कैसे अपना रही साइकिल कल्चर

1. नीदरलैंड्स — “साइकिलों का देश” 1.7 करोड़ आबादी, 2.4 करोड़ साइकिलें। 28% यात्राएं साइकिल से। एम्स्टर्डम में 45.9% लोग साइकिल से काम पर जाते हैं। हर सड़क पर अलग साइकिल लेन।

2. डेनमार्क — कोपेनहेगन मॉडल कोपेनहेगन में 62% लोग लंबी दूरी के लिए भी साइकिल चुनते हैं। 40% लोग साइकिल से ऑफिस जाते हैं। सबसे ज्यादा निवेश साइकिल ब्रिज और हाईवे पर।

3. जर्मनी — बर्लिन उदाहरण बर्लिन में 26.7% लोग साइकिल से काम पर जाते हैं। साइकिल-फ्रेंडली इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार।

4. चीन — ‘साइकिलों का साम्राज्य’ की वापसी 58 करोड़ साइकिल + ई-साइकिल। हर 100 में से 30 यात्राएं दो पहियों पर। प्रदूषण और ट्रैफिक से निपटने को दोबारा बढ़ावा।

5. भारत — क्षमता अपार, सिस्टम कमजोर 50.4% परिवारों के पास साइकिल, पश्चिम बंगाल 78.9% के साथ टॉप। लेकिन ज्यादातर जगह मजबूरी का साधन माना जाता है, स्टेटस सिंबल नहीं। सुरक्षित साइकिल ट्रैक की भारी कमी।

जहां साइकिल अपनाई गई, वहां मोटापा-डायबिटीज कम, प्रदूषण कम, ट्रैफिक जाम कम है l*भारत के लिए सीख:* सिर्फ अपील नहीं, अलग साइकिल लेन और सोच बदलना दोनों जरूरी है

अंत में पूर्व DIG श्री राजीव रंजन सिंह ने कहा — साइकिल चलाना पिछड़ेपन की नहीं, बल्कि समझदारी, स्वास्थ्य और देशभक्ति की निशानी है। साइकिल शर्म नहीं, शान है।”

You may have missed