पटना। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव शनिवार को उस वक्त विवादों में घिर गए जब उन्होंने दावा किया कि भारत निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची से उनका नाम हटा दिया है।
उन्होंने दोपहर करीब 1:30 बजे एक आपातकालीन प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया के समक्ष यह बात रखी और सवाल उठाया कि जब उनका नाम ही सूची में नहीं है तो वह चुनाव कैसे लड़ पाएंगे।तेजस्वी ने आरोप लगाया कि यह विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया के तहत किया गया है और चुनाव आयोग की भूमिका संदिग्ध है।
उन्होंने कहा, “जब मेरा नाम ही हटा दिया गया है, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा है।”लेकिन इस दावे के कुछ ही मिनटों बाद सोशल मीडिया पर एक अलग ही तस्वीर सामने आने लगी। आम लोगों ने निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट से तेजस्वी यादव की मतदाता सूची में मौजूदगी वाला स्क्रीनशॉट खोजकर वायरल कर दिया। इसमें स्पष्ट रूप से उनका नाम, पता और मतदाता पहचान विवरण दिखाई दे रहा था।बीजेपी ने इस मौके को तुरंत भुनाया और तेजस्वी को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा।
बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने तेजस्वी यादव की मतदाता सूची की तस्वीर ट्वीट करते हुए उन्हें “जनता को गुमराह करने वाला नेता” बताया। उन्होंने लिखा, “सिर्फ ध्यान भटकाने के लिए ऐसे झूठे बयान देना तेजस्वी जी की पुरानी आदत है।”इस पूरे घटनाक्रम ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी गर्मी ला दी है। जहां एक ओर आरजेडी समर्थक तेजस्वी के समर्थन में उतर आए हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्ष ने इसे ‘झूठ का प्रचार’ करार देते हुए उन्हें जमकर घेरा है।