अंतरिक्ष में भारत की बड़ी छलांग! अगले 3 साल में 200 से ज्यादा सैटेलाइट चाहिए, ISRO चीफ ने खोला भविष्य का रोडमैप
“अब अकेले ISRO नहीं कर पाएगा यह मिशन, निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को भी संभालनी होगी जिम्मेदारी”
अहमदाबाद में आयोजित IN-SPACe के 10वें इंडस्ट्री कनेक्ट कार्यक्रम में बोलते हुए ISRO प्रमुख ने कहा कि आने वाले तीन वर्षों में भारत को 200 से अधिक नए सैटेलाइट्स की आवश्यकता होगी। यह संख्या मौजूदा क्षमता की तुलना में कई गुना अधिक है और भारत की बढ़ती तकनीकी, सुरक्षा और व्यावसायिक जरूरतों को दर्शाती है।
वर्तमान में भारत के लगभग 56 सैटेलाइट्स अंतरिक्ष में सक्रिय हैं, जो संचार, मौसम पूर्वानुमान, नेविगेशन, रक्षा और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यों में मदद कर रहे हैं। लेकिन तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा की जरूरतों और वैश्विक स्पेस मार्केट में भारत की बढ़ती भूमिका को देखते हुए अब कहीं अधिक सैटेलाइट्स की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
वी. नारायणन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह लक्ष्य केवल ISRO के दम पर हासिल नहीं किया जा सकता। इसके लिए निजी कंपनियों, स्टार्टअप्स, उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों को भी आगे आना होगा।
उन्होंने कहा कि भारत का स्पेस सेक्टर अब केवल सरकारी संस्थानों तक सीमित नहीं है। नए अवसर तेजी से पैदा हो रहे हैं और आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष तकनीक देश की अर्थव्यवस्था और नवाचार का एक बड़ा केंद्र बनने वाली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारत अगले तीन वर्षों में 200 से अधिक सैटेलाइट्स लॉन्च करने में सफल रहता है, तो वह वैश्विक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में अपनी स्थिति को और मजबूत करेगा। साथ ही हजारों नई नौकरियां, स्टार्टअप अवसर और अत्याधुनिक तकनीकी विकास के रास्ते भी खुलेंगे।
भारत का अंतरिक्ष सपना अब सिर्फ रॉकेट लॉन्च करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश को तकनीकी महाशक्ति बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम बनता जा रहा है। आने वाले सालों में आसमान ही नहीं, अंतरिक्ष भी भारत की नई उड़ान का गवाह बनने वाला है।
