June 15, 2026

“बस कुछ दिन और…” बेटे का यही वादा था, फिर आई मौत की खबर; ओमान के पास अमेरिकी हमले में यूपी का लाल शहीद

Ship-Attack

रोटी कमाने निकला था, ताबूत में लौटेगा: अमेरिकी हमले ने उजाड़ दिया उत्तर प्रदेश के एक परिवार का सहारा

उत्तर प्रदेश के एक छोटे से घर में इन दिनों सन्नाटा पसरा है। जिस बेटे की कमाई से परिवार के सपने आकार ले रहे थे, उसी बेटे की मौत की खबर ने पूरे परिवार को तोड़कर रख दिया।

37 वर्षीय शिवानंद चौरसिया अपने परिवार के लिए सिर्फ एक बेटा नहीं, बल्कि पूरे घर की उम्मीद थे। छह महीने पहले उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय जहाज पर अच्छी नौकरी मिली थी। परिवार को लगा था कि अब आर्थिक परेशानियां पीछे छूट जाएंगी। लेकिन किसे पता था कि समुद्र के बीच चल रहा भू-राजनीतिक संघर्ष उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा दुख बन जाएगा।

ओमान तट के पास अमेरिकी सैन्य कार्रवाई में जिस व्यापारी जहाज एमटी सेटेबेलो (MT Settebello) को निशाना बनाया गया, उस पर शिवानंद बतौर इंजन पेटी ऑफिसर (फिटर) तैनात थे। हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हुई, जिनमें शिवानंद भी शामिल थे।

“जल्दी लौटूंगा…” और फिर फोन कभी नहीं आया

शिवानंद के पिता रामजी चौरसिया आज भी बेटे के आखिरी शब्दों को याद कर भावुक हो जाते हैं। उनका कहना है कि कुछ दिन पहले ही बेटे से बात हुई थी। उसने भरोसा दिलाया था कि वह जल्द घर लौटेगा।

लेकिन उसके बाद जो खबर आई, उसने पूरे परिवार की दुनिया ही बदल दी।

परिवार वालों के मुताबिक पिछले कुछ हफ्तों से ईरान, अमेरिका और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चिंता जरूर थी, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि यह संघर्ष सीधे उनके घर तक पहुंच जाएगा।

संघर्ष की आग में फंसे भारतीय नाविक

हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास पिछले कई महीनों से हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। यही रास्ता दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। इसी क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच कई व्यापारी जहाज भी खतरे के दायरे में आ गए हैं।

शिवानंद जिस जहाज पर काम कर रहे थे, वह भी इसी तनाव का शिकार बन गया।

परिवार के सपने अधूरे रह गए

परिजनों का कहना है कि शिवानंद ने हाल ही में बेहतर नौकरी हासिल की थी और घर की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए लगातार मेहनत कर रहे थे। उनकी कमाई से परिवार के कई सपने जुड़े थे।

अब वही घर, जहां उनके लौटने का इंतजार हो रहा था, शोक में डूबा हुआ है।

एक मौत, कई सवाल

यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि उन हजारों भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करती है जो दुनिया भर के समुद्री मार्गों पर काम कर रहे हैं।

शिवानंद अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी कहानी याद दिलाती है कि दुनिया के किसी कोने में होने वाला युद्ध कभी-कभी हजारों किलोमीटर दूर बैठे एक साधारण परिवार की जिंदगी भी बदल देता है।

और शायद सबसे दर्दनाक बात यही है कि एक पिता आज भी अपने बेटे के आखिरी वादे को याद कर रहा है—

“पापा, बस कुछ दिन और… मैं जल्दी घर आऊंगा।”

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