चीन की बदलती आदतों ने हिला दिया तेल बाजार! पेट्रोल-डीजल की मांग में रिकॉर्ड गिरावट, दुनिया भर में मची हलचल
EV, मेट्रो और हाई-स्पीड रेल की ओर बढ़ा चीन, तेल बाजार के पुराने समीकरण बदलने लगे
ताज़ा आंकड़ों के अनुसार चीन में पेट्रोल और डीजल की खपत में अप्रत्याशित गिरावट दर्ज की गई है। देश की सबसे बड़ी रिफाइनिंग कंपनी सिनोपेक के पेट्रोल की बिक्री अप्रैल में सालाना आधार पर 8% और डीजल की बिक्री 6% तक घट गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल आर्थिक मंदी का असर नहीं, बल्कि लोगों की जीवनशैली और यात्रा के तरीकों में आए बड़े बदलाव का संकेत है।
दरअसल, चीनी नागरिक अब निजी वाहनों की बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों, मेट्रो, हाई-स्पीड रेल और सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग कर रहे हैं। अप्रैल में देशभर में EV चार्जिंग की मात्रा पिछले वर्ष की तुलना में 69% बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। वहीं रेल यात्राओं में भी दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह बदलाव किसी सरकारी प्रतिबंध या महामारी जैसी मजबूरी के कारण नहीं हुआ है। बढ़ती ईंधन कीमतों और सस्ते इलेक्ट्रिक विकल्पों ने लोगों को खुद ही पेट्रोल-डीजल से दूरी बनाने के लिए प्रेरित किया है।
इस बदलाव का सीधा असर वैश्विक तेल बाजार पर दिखाई दे रहा है। ईरान युद्ध के कारण जहां दुनिया को तेल आपूर्ति संकट की आशंका थी, वहीं चीन की घटती मांग ने कीमतों पर दबाव कम करने में बड़ी भूमिका निभाई है। मई महीने में चीन का कच्चे तेल का आयात आठ वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह प्रवृत्ति लंबे समय तक जारी रहती है तो वैश्विक तेल उद्योग के लिए यह एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हो सकता है। चीन की रिफाइनिंग कंपनियों को पहले से ही अतिरिक्त उत्पादन क्षमता की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है और मांग में गिरावट इस दबाव को और बढ़ा सकती है।
दुनिया के लिए बड़ा संकेत
एक समय था जब चीन की बढ़ती तेल खपत वैश्विक बाजार को दिशा देती थी। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। इलेक्ट्रिक वाहनों, आधुनिक सार्वजनिक परिवहन और बदलती उपभोक्ता सोच के कारण चीन धीरे-धीरे तेल आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ रहा है। यही वजह है कि विशेषज्ञ इसे सिर्फ एक आर्थिक खबर नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा व्यवस्था में शुरू हो रहे बड़े बदलाव का संकेत मान रहे हैं।
बड़ी बात
चीन में पेट्रोल-डीजल की मांग जितनी तेजी से घट रही है, उतनी ही तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ रहा है। अगर यह रुझान जारी रहा, तो आने वाले वर्षों में दुनिया का ऊर्जा बाजार पूरी तरह बदल सकता है।
