नई दिल्ली: देश के चर्चित National Chambal Gharial Sanctuary में लगातार जारी अवैध रेत खनन को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपना लिया है। अदालत ने मीडिया रिपोर्ट का स्वतः संज्ञान लेते हुए इस मामले में गंभीर चिंता जताई और अधिकारियों को आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं।
दरअसल, एक राष्ट्रीय समाचार रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि चंबल अभयारण्य क्षेत्र में बिना रजिस्ट्रेशन वाले वाहनों के जरिए अवैध रेत खनन लगातार जारी है। रिपोर्ट सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें Justice Vikram Nath और Justice Sandeep Mehta शामिल थे, ने मामले को गंभीर पर्यावरणीय और वन्यजीव संरक्षण संकट माना।
अदालत ने कहा कि अवैध खनन केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि इससे संरक्षित वन्यजीवों और पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंच रहा है। खासतौर पर घड़ियाल, डॉल्फिन और कई दुर्लभ प्रजातियों के प्राकृतिक आवास पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। कोर्ट ने इस बात पर भी चिंता जताई कि प्रतिबंधों के बावजूद अवैध गतिविधियां रुक नहीं रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने अधिकारियों को निगरानी बढ़ाने, अवैध खनन में इस्तेमाल हो रहे वाहनों पर कार्रवाई करने और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने संकेत दिए कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो भविष्य में और कठोर आदेश दिए जा सकते हैं।
चंबल क्षेत्र लंबे समय से अवैध रेत खनन को लेकर चर्चा में रहा है। पर्यावरणविदों का कहना है कि लगातार हो रहे खनन से नदी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है और वन्यजीवों का अस्तित्व खतरे में पड़ता जा रहा है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस मुद्दे पर सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता को पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग अदालत के इस रुख की सराहना कर रहे हैं और अवैध खनन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि कोर्ट के निर्देशों के बाद प्रशासन जमीन पर कितनी तेजी और सख्ती से कार्रवाई करता है।