मंगलवार को देश की राजनीति में एक नया घमासान देखने को मिला, जब केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के “आर्थिक तूफान” वाले बयान पर तीखा पलटवार किया।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब राहुल गांधी ने दावा किया कि देश एक बड़े आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहा है, जिसका सबसे ज्यादा असर किसानों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों और युवाओं पर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों की सरकारी नीतियों का असर अब धीरे-धीरे सामने आने लगा है और आने वाले समय में आम लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
राहुल गांधी के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कांग्रेस पर जनता के बीच “अनावश्यक डर” फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कांग्रेस को “रुकावट पैदा करने वाली राजनीति” करने वाला बताते हुए कहा कि मोदी सरकार की नीतियां हमेशा आम नागरिकों के हित में रही हैं, न कि केवल बड़े उद्योगपतियों के लिए।
सोशल मीडिया पर साझा किए गए अपने विस्तृत जवाब में सीतारमण ने जन धन योजना, मुद्रा लोन, पीएम-किसान और स्वनिधि जैसी योजनाओं का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इन योजनाओं ने किसानों, महिलाओं, युवाओं और छोटे कारोबारियों को सीधा फायदा पहुंचाया है। साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या ये योजनाएं “अडानी और अंबानी” के लिए बनाई गई थीं?
इस बयानबाजी के बाद एक बार फिर देश की अर्थव्यवस्था राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गई है। विपक्ष जहां बेरोजगारी, महंगाई और बढ़ती ईंधन कीमतों को लेकर सरकार को घेर रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और उसकी जनकल्याणकारी नीतियां करोड़ों लोगों तक फायदा पहुंचा रही हैं।
आने वाले राजनीतिक मुकाबलों से पहले बीजेपी और कांग्रेस के बीच अर्थव्यवस्था को लेकर जारी यह जुबानी जंग और तेज होती दिखाई दे रही है। फिलहाल इतना साफ है कि आर्थिक मुद्दे आने वाले समय में देश की राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र बनने वाले हैं।