मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने पाकिस्तान के माध्यम से अमेरिका को बातचीत का नया प्रस्ताव भेजा है। इस प्रस्ताव के बाद वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है। हालांकि, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के इस ऑफर को खारिज कर दिया है, जिससे डील की उम्मीदों पर पानी फिरता दिख रहा है।*क्या है ईरान का प्रस्ताव?*सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने स्टेप-बाय-स्टेप डील का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत:1. *पहला चरण:* US-इजराइल युद्ध औपचारिक रूप से खत्म किया जाए और दोबारा हमला न करने की गारंटी दी जाए।2. *दूसरा चरण:* अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटाए और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान के नियंत्रण में खोला जाए।3. *आखिरी चरण:* न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत शुरू की जाए।ईरान ने यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए वॉशिंगटन भेजा है। पाकिस्तान इस समय दोनों देशों के बीच मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।*ट्रंप का सख्त रुख, ऑफर रिजेक्ट*अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका चाहता है कि न्यूक्लियर मुद्दा किसी भी डील का “केंद्र बिंदु” हो और पहले सुलझाया जाए। विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कहा, “कोई भी समझौता ऐसा होना चाहिए जो ईरान को परमाणु हथियार बनाने से पूरी तरह रोके।”ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि नाकाबंदी जारी रहेगी और सैन्य कार्रवाई का विकल्प अभी खुला है। US सेंट्रल कमांड ने ईरान पर सीमित हमलों की योजना भी तैयार कर ली है।*हॉर्मुज संकट से तेल पर असर*हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है। यहीं से वैश्विक तेल और गैस सप्लाई का लगभग 20% गुजरता है। – *28 फरवरी* को US-इजराइल हमलों के बाद ईरान ने इस रास्ते को ब्लॉक कर दिया था।- जवाब में *अमेरिका ने ईरानी तेल निर्यात* रोकने के लिए नौसेना तैनात कर दी।- इससे *ब्रेंट क्रूड की कीमतों में तेज उछाल* आया और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ा।ईरान के प्रस्ताव में हॉर्मुज खोलने की बात से बुधवार को तेल कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई, लेकिन US के इनकार के बाद फिर अनिश्चितता बढ़ गई है।*युद्ध का खतरा बरकरार*8 अप्रैल से लागू सीजफायर के बावजूद हालात तनावपूर्ण हैं। – *ईरान ने एयर डिफेंस सिस्टम* एक्टिव कर दिए हैं और चेतावनी दी है कि हमला हुआ तो कड़ा जवाब मिलेगा।- *खुफिया रिपोर्ट्स* के मुताबिक, ईरान को आशंका है कि अमेरिका सीमित हमला कर सकता है, जिसके बाद इजराइल भी कार्रवाई करेगा।- *फरवरी में* भी ऐसे ही हमलों के बाद ईरान ने अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया था और हिज्बुल्लाह ने इजराइल पर मिसाइलें दागी थीं।*आगे क्या?*विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बातचीत फेल हुई तो हॉर्मुज लंबे समय तक बंद रह सकता है। इससे तेल की कीमतें फिर आसमान छू सकती हैं। फिलहाल गेंद अमेरिका के पाले में है। ट्रंप का अगला कदम ही तय करेगा कि मिडिल ईस्ट में शांति लौटेगी या एक और जंग का आगाज होगा। ईरान ने साफ कर दिया है कि “धमकी के साए में बातचीत नहीं होगी।”