May 20, 2026

ईरान की धरती पर 134 साल पुराना विष्णु मंदिर! अमिताभ बच्चन की पोस्ट ने दुनिया को चौंकाया, भारत-ईरान रिश्तों की खुली अनसुनी कहानी

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अमेरिका-ईरान तनाव और पश्चिम एशिया युद्ध की खबरों के बीच अचानक एक ऐसी तस्वीर सामने आई जिसने सोशल मीडिया पर लोगों को हैरान कर दिया। बॉलीवुड महानायक अमिताभ बच्चन द्वारा शेयर किए गए ईरान के 134 साल पुराने विष्णु मंदिर के वीडियो ने इंटरनेट पर नई बहस छेड़ दी है। लोग यह जानकर चौंक गए कि इस्लामिक देश ईरान में भी एक भव्य हिंदू मंदिर मौजूद है, जिसे भारतीय व्यापारियों ने 19वीं सदी में बनवाया था।

ईरान के बंदर अब्बास शहर में स्थित यह ऐतिहासिक विष्णु मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत और ईरान के सदियों पुराने सांस्कृतिक और व्यापारिक रिश्तों की जीवित निशानी माना जाता है। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 1888 में शुरू हुआ था और करीब चार साल बाद यह पूरी तरह तैयार हुआ। उस दौर में बड़ी संख्या में भारतीय व्यापारी ईरान के इस बंदरगाह शहर में व्यापार करते थे और उन्होंने अपने धार्मिक एवं सांस्कृतिक अस्तित्व को बनाए रखने के लिए इस मंदिर का निर्माण कराया।

इस मंदिर की सबसे खास बात इसकी अनोखी वास्तुकला है। इसमें भारतीय और फारसी आर्किटेक्चर का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। मंदिर का सफेद गुंबद पहली नजर में किसी इस्लामिक इमारत जैसा दिखाई देता है, लेकिन उसके भीतर हिंदू धार्मिक प्रतीकों और भारतीय शैली की झलक साफ नजर आती है। मंदिर में 72 छोटी मीनारनुमा संरचनाएं हैं, जिन पर हिंदू आकृतियां बनी हुई हैं। यही वजह है कि यह मंदिर आज भी इतिहासकारों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

हालांकि अब यहां नियमित पूजा नहीं होती, लेकिन ईरानी सांस्कृतिक विभाग ने इसे ऐतिहासिक धरोहर के रूप में संरक्षित कर रखा है। स्थानीय लोग इसे भारत और ईरान की दोस्ती का प्रतीक मानते हैं। सोशल मीडिया पर अमिताभ बच्चन की पोस्ट वायरल होने के बाद लाखों लोग इस मंदिर के इतिहास को जानने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान में आज भी करीब 20 हजार हिंदू रहते हैं, जिनमें अधिकतर भारतीय मूल के व्यापारी और उनके परिवार शामिल हैं। यह मंदिर कभी वहां बसे भारतीय समुदाय के लिए “लिटिल इंडिया” की तरह था, जहां लोग मिलते-जुलते और अपनी संस्कृति को जीवित रखते थे।

एक तरफ दुनिया ईरान को सिर्फ युद्ध और राजनीति के नजरिए से देख रही है, वहीं यह मंदिर बताता है कि इतिहास में भारत और ईरान के बीच सांस्कृतिक संबंध कितने गहरे रहे हैं। यही वजह है कि अब यह मंदिर सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की ऐतिहासिक पहचान और वैश्विक सांस्कृतिक प्रभाव का भी प्रतीक बनता जा रहा है।

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