May 12, 2026

ग्राम पंचायतों के वित्तीय सशक्तिकरण की दिशा में दो दिवसीय प्रशिक्षण

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● जिला पंचायत संसाधन केंद्र में हुआ आयोजन

जमशेदपुर : राज्य सरकार एवं पंचायती राज विभाग, झारखंड के निर्देशानुसार पंचायतों के वित्तीय सशक्तिकरण को बढ़ावा देने हेतु दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन 28 एवं 29 नवम्बर को जिला पंचायत संसाधन केंद्र (डीपीआरसी), जमशेदपुर में किया गया. प्रशिक्षण का उद्देश्य ग्राम पंचायतों को स्वयं के राजस्व स्रोत की जानकारी प्रदान करना तथा ग्राम स्तर पर राजस्व सृजन के माध्यम से वित्तीय आत्मनिर्भरता विकसित करना था. प्रशिक्षण में सभी 11 प्रखंडों के पंचायती राज से संबंधित अधिकारी एवं कर्मियों ने भाग लिया. इस दौरान राज्यस्तरीय प्रशिक्षक अजय कुमार मिश्र एवं सुशांत कुमार ढोके ने प्रतिभागियों को विभिन्न तकनीकी, व्यवहारिक एवं प्रबंधन संबंधी विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षण दिया जिनमें ग्राम पंचायतों के स्वयं के राजस्व स्रोतों की पहचान, वर्गीकरण एवं उनकी महत्ता, ओएसआर संवर्धन हेतु रणनीतियां एवं पंचायत स्तर पर व्यवहार्य कार्ययोजना निर्माण की प्रक्रिया, कर भुगतान के प्रति ग्रामीणों में सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने, ग्राम विकास योजनाओं में ओएसआर के प्रभावी उपयोग एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उपाय, नवीन वित्तीय विकल्प जैसे पीपीपी मॉडल, सीएसआर फंड एवं स्थानीय निवेश के अवसर, सतत संसाधन सृजन हेतु राजस्व पूर्वानुमान, योजना निर्माण एवं कार्यान्वयन प्रक्रिया, एसडब्लूओटी विश्लेषण के माध्यम से पंचायतों की वित्तीय स्थिति का यथार्थ मूल्यांकन, ग्राम पंचायत विकास योजना में परियोजना प्रबंधन कौशल का व्यावहारिक उपयोग आदि थे.
प्रशिक्षण सत्रों में समूह कार्य, चर्चा सत्र एवं केस स्टडी के माध्यम से प्रतिभागियों को व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया गया. प्रशिक्षकों ने पंचायतों की स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित उदाहरणों के माध्यम से यह बताया कि किस प्रकार संपत्ति कर, बाजार शुल्क, जल उपयोग शुल्क, संपत्ति उपयोग शुल्क जैसे स्रोतों से स्थायी एवं पारदर्शी राजस्व सृजन किया जा सकता है. प्रतिभागियों को विभागीय नीतियों, ऑनलाइन उपकरणों एवं डेटा-आधारित योजना निर्माण के व्यावहारिक उपयोग से भी अवगत कराया गया. समापन सत्र में प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए. प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन जिला पंचायत राज पदाधिकारी रिंकू कुमारी एवं डीपीएम राजू झा ने किया. उन्होंने सभी मुखिया एवं सचिवों से अपील की कि वे प्रशिक्षण से प्राप्त ज्ञान को व्यवहार में लाकर अपने पंचायत क्षेत्र में राजस्व संग्रहण की एक पारदर्शी, उत्तरदायी एवं सतत प्रणाली विकसित करें.

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