बंदी प्रताक्षीकरण मामले में आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी, चतरा एसपी को गिरफ्तारी के निर्देश
Ranchi/Jharkhand : झारखंड उच्च न्यायालय ने अदालती आदेशों की अवहेलना करने पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। एक बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मो. अब्दुल हकीम के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी कर दिया है। अदालत ने चतरा के पुलिस अधीक्षक (SP) को स्पष्ट निर्देश दिया है कि आरोपी को गिरफ्तार कर 1 अप्रैल 2026 तक हर हाल में अदालत में पेश किया जाए।
अदालत ने जताई नाराजगी
गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि बार-बार निर्देश देने के बावजूद मो. अब्दुल हकीम खंडपीठ के समक्ष उपस्थित नहीं हुए। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने पुलिस को बल प्रयोग कर उन्हें लाने का आदेश दिया है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार का पक्ष महाधिवक्ता (Advocate General) राजीव रंजन ने रखा।
क्या है पूरा मामला?
यह कानूनी कार्यवाही अख्तरी खातून द्वारा दायर की गई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ी है। याचिकाकर्ता मां ने अपने बेटे की बरामदगी की गुहार लगाई है। पिछली सुनवाई के दौरान अदालत को यह अंदेशा हुआ था कि मामले में कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को जानबूझकर छिपाया जा रहा है। इसी संदेह के आधार पर अदालत ने पूर्व में निम्नलिखित निर्देश दिए थे।
जांच के आदेश : चतरा एसपी को पूरे मामले की गहराई से जांच कर रिपोर्ट सौंपने को कहा गया था।
व्यक्तिगत उपस्थिति : अदालत ने अख्तरी खातून, मोहम्मद गुलाम और मोहम्मद अब्दुल हकीम को 19 मार्च को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होने का आदेश दिया था।
अगली सुनवाई 1 अप्रैल को
निर्धारित तिथि पर अख्तरी खातून और अन्य तो मौजूद रहे, लेकिन मोहम्मद अब्दुल हकीम की अनुपस्थिति ने अदालत को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया। अब चतरा पुलिस के पास आरोपी को ढूंढकर पेश करने के लिए सीमित समय है। मामले की अगली सुनवाई 1 अप्रैल को मुकर्रर की गई है, जिसमें पुलिस को अपनी कार्रवाई की रिपोर्ट भी सौंपनी होगी।