June 13, 2026

झारखंड का बड़ा दावा: केंद्र पर ₹1.36 लाख करोड़ बकाया! नीति आयोग की बैठक में हेमंत सोरेन ने उठाए कई बड़े सवाल

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नई दिल्ली/रांची:

क्या देश को खनिज संपदा देने वाले राज्यों को उनका पूरा हक मिल रहा है? नीति आयोग की बैठक में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कुछ ऐसे ही सवालों के साथ केंद्र सरकार के सामने एक बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि कोयला खनन से जुड़े बकाया मदों में केंद्र सरकार और केंद्रीय उपक्रमों पर झारखंड का करीब 1.36 लाख करोड़ रुपये बकाया है, जिसे जल्द जारी किया जाना चाहिए।

11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड को केवल खनिज संसाधनों का स्रोत मानने की सोच बदलनी होगी। राज्य को विकास यात्रा में बराबरी का भागीदार बनाया जाना चाहिए ताकि ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को वास्तविक रूप दिया जा सके।

कोयला देता है झारखंड, लेकिन विकास की रफ्तार क्यों धीमी?

बैठक में हेमंत सोरेन ने जोर देकर कहा कि वर्षों से कोयला उत्पादन और खनन गतिविधियों से देश को ऊर्जा मिलती रही है, लेकिन खनिज संपदा से समृद्ध राज्यों को अपेक्षित आर्थिक लाभ नहीं मिल पाया। उन्होंने कोयला कंपनियों और केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों से लंबित राशि जारी करने की मांग करते हुए कहा कि यह धन राज्य के विकास, बुनियादी ढांचे और सामाजिक योजनाओं को नई गति दे सकता है।

जल जीवन मिशन के लिए भी मांगी मदद

मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से जल जीवन मिशन के तहत लंबित लगभग 6,000 करोड़ रुपये जारी करने की भी मांग की। उनका कहना था कि इससे ग्रामीण इलाकों में पेयजल परियोजनाओं को तेजी से पूरा किया जा सकेगा और लाखों लोगों को इसका लाभ मिलेगा।

सिर्फ खनन नहीं, उद्योग और नवाचार का केंद्र बने झारखंड’

सोरेन ने स्पष्ट कहा कि झारखंड की पहचान केवल खदानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। राज्य को विनिर्माण, अनुसंधान, नवाचार और नई तकनीकों का केंद्र बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, ग्रीन एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और एग्रो-फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने की वकालत की।

मुख्यमंत्री ने यह भी सुझाव दिया कि महत्वपूर्ण खनिजों पर आधारित उद्योगों और रिसर्च सेंटरों की स्थापना से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिलेगी।

भूमि और विकास परियोजनाओं पर भी उठाई आवाज

बैठक में उन्होंने भूमि अधिग्रहण और भूमि उपयोग स्वीकृतियों को अधिक लचीला बनाने की मांग की। उनका कहना था कि कई सामाजिक और आधारभूत संरचना परियोजनाएं केवल प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण वर्षों तक अटकी रहती हैं। यदि नियमों में आवश्यक सुधार किए जाएं तो विकास कार्यों में तेजी लाई जा सकती है।

‘संसाधन देने वाले नहीं, विकास के साझेदार बनें राज्य’

अपने संबोधन के अंत में हेमंत सोरेन ने केंद्र सरकार और नीति आयोग से झारखंड के लिए दीर्घकालिक विकास दृष्टि तैयार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि खनिज संपदा को मानव विकास, औद्योगिक प्रगति और सामाजिक न्याय से जोड़ना समय की मांग है।

मुख्यमंत्री का कहना था कि यदि भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाना है तो झारखंड जैसे राज्यों को केवल संसाधन उपलब्ध कराने वाले प्रदेशों के रूप में नहीं, बल्कि विकास के समान भागीदार के रूप में देखा जाना चाहिए।

अब नजर केंद्र के रुख पर

नीति आयोग की बैठक में उठी यह मांग केवल बकाया राशि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस बहस को भी जन्म देती है कि देश की अर्थव्यवस्था को ऊर्जा देने वाले राज्यों को उनके योगदान के अनुपात में कितना लाभ मिल रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि केंद्र सरकार झारखंड की इन मांगों पर क्या फैसला लेती है।

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