May 20, 2026

“जंग के मैदान में फिर लौटा ‘कसाई कमांडर’?” — युद्ध अपराधों के आरोपों के बीच सूडान में मचा नया तूफान

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सूडान के गृहयुद्ध से जुड़ी एक चौंकाने वाली खबर ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। Rapid Support Forces (RSF) के ब्रिगेडियर जनरल अल-फतेह अब्दुल्ला इदरीस, जिन्हें “अबू लुलु” के नाम से जाना जाता है, कथित युद्ध अपराधों के आरोपों के बावजूद फिर से युद्ध के मैदान में सक्रिय दिखाई दिए हैं। Reuters की एक बड़ी जांच रिपोर्ट के मुताबिक, जिन कमांडर पर निहत्थे लोगों की हत्या के आरोप लगे थे, उन्हें जेल से रिहा कर दोबारा मोर्चे पर भेज दिया गया।

रिपोर्ट के अनुसार, अक्टूबर 2025 में अल-फाशिर पर कब्जे के बाद सामने आए कई वीडियो में अबू लुलु कथित तौर पर निहत्थे लोगों पर गोली चलाते नजर आए थे। Reuters द्वारा सत्यापित चार वीडियो में कम से कम 15 लोगों की हत्या का दावा किया गया है। इन घटनाओं के बाद RSF ने उन्हें हिरासत में लिया था और जांच का आश्वासन दिया गया था। बाद में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने भी फरवरी में उन पर मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों को लेकर प्रतिबंध लगाए।

लेकिन अब सामने आई जानकारी ने पूरे मामले को और विवादित बना दिया है। सूत्रों के मुताबिक, RSF ने दिसंबर में ही चुपचाप उन्हें रिहा कर दिया था। मार्च में उन्हें कोर्डोफान इलाके में लड़ाई के दौरान फिर देखा गया। हालांकि RSF इन दावों को “पूरी तरह झूठा” बता रही है और कह रही है कि अबू लुलु को रिहा नहीं किया गया।

इस खुलासे ने युद्धग्रस्त सूडान में न्याय व्यवस्था और मानवाधिकारों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि यदि युद्ध अपराधों के आरोपियों को बिना जवाबदेही के फिर से हथियार सौंपे जा रहे हैं, तो यह पूरे क्षेत्र में हिंसा और अस्थिरता को और बढ़ा सकता है।

सूडान पहले ही लंबे समय से गृहयुद्ध, भूख, विस्थापन और मानवीय संकट से जूझ रहा है। लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो चुके हैं और हजारों नागरिकों की जान जा चुकी है। ऐसे में अबू लुलु की वापसी की खबर ने संघर्ष की आग को और भड़का दिया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है —क्या युद्ध अपराधों के आरोप केवल कागजों तक सीमित रह जाएंगे, या कभी वास्तविक जवाबदेही भी तय होगी?

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