लीज नवीकरण से पूर्व विस्थापित रैयतों के अधिकार सुनिश्चित करेंझारखंड मूलवासी अधिकार मंच ने सौंपा उपायुक्त को ज्ञापन
सर्च न्यूज: सच के साथ: जमशेदपुर : झारखंड मूलवासी अधिकार मंच के मुख्य संयोजक एवं झारखंड आंदोलनकारी हरमोहन महतो के नेतृत्व में मंच के सदस्यों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर टाटा लीज नवीकरण से पूर्व विस्थापित आदिवासी एवं मूलवासी रैयतों के अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की है. ज्ञापन में कहा गया है कि जमशेदपुर में टाटा कम्पनी की स्थापना के दौरान 18 मौजा के मूल रैयत खतियानधारी आदिवासी एवं मूलवासी परिवार विस्थापित हुए थे. मंच ने मांग की है कि लीज नवीकरण की प्रक्रिया से पहले इन विस्थापित परिवारों का व्यापक सर्वे कराया जाए तथा उन्हें विस्थापित प्रमाण पत्र, पुनर्वास, उचित मुआवजा, रोजगार एवं जमीन वापसी का अधिकार दिया जाए.हरमोहन महतो ने यह भी मांग की है कि वर्ष 1996 के सर्वे खतियान को रद्द कर वर्ष 1908 एवं 1937 के मूल खतियान को मान्यता दी जाए. कहा कि मूल रैयतों के अधिकारों की अनदेखी कर किसी भी प्रकार का लीज नवीकरण न्यायसंगत नहीं होगा. ज्ञापन में राजस्व, निबंधन एवं भूमि सुधार विभाग के एक पत्र तथा मंच द्वारा पूर्व में दिये गये आवेदन का भी उल्लेख किया गया है. मंच का कहना है कि विस्थापितों द्वारा खतियान और जमीन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज तत्कालीन उपायुक्त को सौंपे गये थे. अब यह स्पष्ट किया जाए कि क्या उन दस्तावेजों एवं प्रस्तावों को सरकार के पास भेजा गया था. यदि भेजा गया था तो उसे सार्वजनिक किया जाए ताकि प्रभावित रैयतों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके. हरमोहन ने कहा कि जब तक विस्थापितों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. ज्ञापन सौंपने के दौरान हरमोहन के साथ उत्तम कुमार प्रधान, तपन कुमार पांडा, गौर हेम्ब्रम, मनोज बोदरा, ग्लोमे कुंटिया, सोमाया हो, सानंद गौर, लक्ष्मण बोदरा, संजय हेम्ब्रम, राम चन्द्र महतो भी शामिल थे.
