May 21, 2026

“मणिपुर की सांसें थमीं”: कुकी-नागा बंद से हाईवे जाम, हालात फिर विस्फोटक

1779162548503

मणिपुर एक बार फिर गंभीर तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। राज्य की जीवनरेखा माने जाने वाले नेशनल हाईवे-2 पर कुकी और नागा संगठनों द्वारा लगाए गए समानांतर आर्थिक बंद ने पूरे प्रदेश को लगभग ठहराव की स्थिति में पहुंचा दिया है। सैकड़ों ट्रक, जरूरी सामान और यात्री रास्तों में फंसे हुए हैं, जबकि कई इलाकों में डर और बेचैनी का माहौल गहराता जा रहा है।

बताया जा रहा है कि हालिया हिंसा और कई लोगों के लापता होने की घटनाओं के बाद दोनों समुदायों में गुस्सा बढ़ गया है। यूनाइटेड नागा काउंसिल ने दावा किया है कि उनके छह लोग, जिनमें दो पादरी भी शामिल हैं, अब तक लापता हैं। वहीं कुकी संगठनों का आरोप है कि सरकार अब तक उनके समुदाय के लोगों को सुरक्षित वापस लाने में नाकाम रही है। इसी के विरोध में बंद को आगे बढ़ा दिया गया है।

स्थिति उस समय और अधिक संवेदनशील हो गई जब कांगपोकपी जिले के पास तीन चर्च नेताओं की हत्या की खबर सामने आई। इस घटना ने पहले से मौजूद जातीय तनाव को और भड़का दिया। सुरक्षा एजेंसियों ने चुराचांदपुर और कांगपोकपी के संवेदनशील इलाकों में बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिए हैं। कई जगहों पर अतिरिक्त सुरक्षाबलों की तैनाती की गई है और संदिग्ध उग्रवादी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

सरकारी सूत्रों के अनुसार, हिंसा के दौरान 38 लोगों के लापता होने की खबर थी, जिनमें से 32 लोग वापस लौट चुके हैं, लेकिन बाकी लोगों की तलाश अब भी जारी है। इस बीच चर्च नेताओं और सामाजिक संगठनों ने शांति बहाली की कोशिशें तेज कर दी हैं। अलग-अलग टीमें प्रभावित जिलों में जाकर दोनों समुदायों के बीच संवाद स्थापित करने और बंधकों की सुरक्षित रिहाई की अपील करेंगी।

मणिपुर में लगातार बढ़ता तनाव अब सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि यह मानवीय संकट का रूप लेता दिखाई दे रहा है। लोगों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और शांति वार्ता की कोशिशें इस बार हालात को कितना संभाल पाती हैं।

You may have missed