NEET विवाद ने ली 9 जिंदगियां? कांग्रेस बोली- यह अक्षम्य पाप है
नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET 2026 का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के बाद लाखों छात्रों के भविष्य पर मंडरा रहे संकट के बीच अब एक ऐसा दावा सामने आया है जिसने पूरे देश को झकझोर दिया है।
सपनों पर लगा ब्रेक, टूटता गया छात्रों का मनोबलहर
साल लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर NEET परीक्षा में शामिल होते हैं। कई छात्र वर्षों तक दिन-रात मेहनत करते हैं, कोचिंग और पढ़ाई पर लाखों रुपये खर्च करते हैं। लेकिन पेपर लीक की खबर सामने आने और परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठने के बाद हजारों अभ्यर्थियों के सपनों को बड़ा झटका लगा।
परीक्षा दोबारा आयोजित होने की स्थिति ने छात्रों पर मानसिक दबाव और बढ़ा दिया। कई छात्र लगातार तनाव, चिंता और भविष्य को लेकर असमंजस की स्थिति में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं का बढ़ता दबाव और अनिश्चितता युवाओं की मानसिक सेहत पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
कांग्रेस का हमला, सरकार से मांगे जवाब
कांग्रेस ने अपने पोस्ट में कहा कि यदि ये घटनाएं सच हैं तो यह केवल एक परीक्षा की विफलता नहीं बल्कि लाखों युवाओं के विश्वास के साथ हुआ खिलवाड़ है। पार्टी ने सरकार से सवाल पूछा है कि आखिर ऐसी स्थिति पैदा क्यों हुई जिसमें छात्रों को अपने भविष्य को लेकर इतना निराश होना पड़ा।
विपक्ष का आरोप है कि पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि युवाओं के सपनों के साथ अन्याय हैं। वहीं सरकार और संबंधित एजेंसियां लगातार जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की बात कह रही हैं।
सिर्फ परीक्षा नहीं, मानसिक स्वास्थ्य का भी संकट
NEET विवाद ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भारत की प्रतिस्पर्धी परीक्षा प्रणाली छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को पर्याप्त महत्व दे रही है? विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावकों, शिक्षकों और सरकार को मिलकर ऐसा माहौल बनाना होगा जहां छात्र असफलता या अनिश्चितता के दौर में भी खुद को अकेला महसूस न करें।
देश इंतजार कर रहा जवाबों का
NEET 2026 विवाद अब केवल पेपर लीक तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला करोड़ों युवाओं के भरोसे, उनके सपनों और शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता से जुड़ गया है। 9 छात्रों की मौत के दावे ने पूरे देश को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर प्रतियोगी परीक्षाओं का यह दबाव युवाओं को किस दिशा में ले जा रहा है।
फिलहाल जांच जारी है, लेकिन एक सवाल हर किसी के मन में है— क्या देश के भविष्य के साथ ऐसा खिलवाड़ दोबारा रोका जा सकेगा?
