नहीं रहे ‘जनरल साहब’… उत्तराखंड की राजनीति का एक युग हुआ समाप्त
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति और सार्वजनिक जीवन से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्री और भारतीय सेना के मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) भुवन चंद्र खंडूड़ी का 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन के साथ ही उत्तराखंड ने एक ऐसे नेता को खो दिया, जिन्हें ईमानदार छवि, अनुशासित प्रशासन और विकास के प्रति समर्पण के लिए हमेशा याद किया जाएगा।
भुवन चंद्र खंडूड़ी का जीवन केवल राजनीति तक सीमित नहीं था। भारतीय सेना में लगभग चार दशकों तक सेवा देने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा और अपनी सादगी, स्पष्टवादिता तथा कार्यशैली से अलग पहचान बनाई। सेना का अनुशासन उनके राजनीतिक जीवन में भी साफ दिखाई देता था, यही वजह रही कि उन्हें जनता और प्रशासन दोनों के बीच विशेष सम्मान प्राप्त था।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने दो बार राज्य की कमान संभाली। वहीं केंद्र सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री रहते हुए देश के सड़क नेटवर्क को मजबूत करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत के राजमार्ग विकास से जुड़े कई बड़े प्रयासों में उनका योगदान आज भी याद किया जाता है।
उत्तराखंड की राजनीति में उन्हें केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक सिद्धांतवादी और स्वच्छ छवि वाले जनसेवक के रूप में देखा जाता था। उनके जाने से एक ऐसा अध्याय समाप्त हुआ है, जिसने राजनीति में मर्यादा, ईमानदारी और सेवा की मिसाल कायम की।
भुवन चंद्र खंडूड़ी अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन सेना से लेकर संसद और उत्तराखंड की सत्ता तक उनकी सेवाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।
