भगवान बिरसा के पदचिह्नों पर चलना ही सच्ची श्रद्धांजलि : कुलपति
भगवान बिरसा मुंडा की पुण्यतिथि पर कोल्हान विश्वविद्यालय में श्रद्धांजलि सभा आयोजितचाईबासा, 9 जून।
कुलपति ने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर के विभिन्न कक्षों एवं सभागारों का नामकरण आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों एवं जननायकों के नाम पर करने की पहल की जाएगी। उन्होंने शिक्षकों को आदिवासी समाज के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों एवं जननायकों पर व्याख्यानमालाओं, संगोष्ठियों तथा शोध गतिविधियों केवल आयोजन के लिए भी प्रोत्साहित किया।कुलसचिव डॉ. रंजीत कुमार कर्ण ने अपने संबोधन में भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली उलीहातू के शैक्षणिक भ्रमण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों एवं शोधार्थियों को जमीनी स्तर पर शोध कर आदिवासी इतिहास, संस्कृति और स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े उन तथ्यों को सामने लाना चाहिए जिन्हें इतिहास में अपेक्षित स्थान नहीं मिल सका है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के इतिहास के अनेक पक्षों के पुनर्लेखन और पुनर्पाठ की आवश्यकता है।
हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. विजय कुमार ने अपने वक्तव्य में भगवान बिरसा मुंडा के साथ-साथ अन्य आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों एवं जननायकों के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ऐसे अनेक नायक हैं, जिनके संघर्ष और बलिदान को व्यापक पहचान मिलनी अभी शेष है।
कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) के तत्वावधान में विश्वविद्यालय की कार्यक्रम समन्वयक डॉ. मीनाक्षी मुंडा द्वारा किया गया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. प्रभात कुमार ने किया।
इस अवसर पर डॉ. सुनीता कुमारी, डॉ. धर्मेंद्र रजक, डॉ. शोभित रंजन, डॉ. नितीश महतो, डॉ. महेंद्र राणा, डॉ. श्रीमंत राय, उप कुलसचिव मुरारी कुमार मिश्रा, संस्कृत विभागाध्यक्ष डॉ. निवारण मेहता, अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. सरोज कैवर्त, मनसा मुर्मू, आकाश कुमार, आनिल तियु, सुदर्शन, सत्यवान गोप, गुलशन सुंडी, रश्मि कड़जी, जिगिता सवैया, शर्मिला दास सहित अन्य शिक्षक, पदाधिकारी एवं शिक्षकेत्तर कर्मचारी उपस्थित थे।कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों ने भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
