पानी पर मंडराया ‘युद्ध’ का खतरा!
सूखते कुएं, बढ़ता संकट… बांग्लादेश के किसानों की जिंदगी पर जल संकट का सबसे बड़ा वार
किसानों का कहना है कि अब पहले की तुलना में कहीं ज्यादा गहराई तक पाइप डालने के बाद भी पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। कई गांवों में हालात ऐसे हैं कि ट्यूबवेल चलाने पर भी पानी नहीं निकलता। खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि उत्पादन घटता जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक बारिंद क्षेत्र का 82 प्रतिशत से अधिक हिस्सा गंभीर जल संकट की चपेट में है। लगातार भूजल दोहन, अनियमित बारिश और जलवायु परिवर्तन ने स्थिति को और विकराल बना दिया है। यही वजह है कि सरकार को हजारों गांवों में सिंचाई के लिए भूजल उपयोग पर प्रतिबंध तक लगाना पड़ा था।
सबसे बड़ी चिंता किसानों के भविष्य को लेकर है। कई परिवार अब अपने बच्चों को खेती से दूर अन्य रोजगार तलाशने की सलाह दे रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले वर्षों में खेती करना बेहद मुश्किल हो जाएगा।
27 वर्षीय किसान मोहम्मद आसिफ की चिंता पूरे क्षेत्र की कहानी बयां करती है। उनका कहना है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी सबसे बड़ा संघर्ष बन सकता है। उन्हें डर है कि एक दिन हालात इतने खराब हो सकते हैं कि लोग पानी के लिए आपस में लड़ने लगें।
विशेषज्ञ अब वर्षा जल संचयन, तालाबों के पुनर्जीवन और कम पानी वाली खेती को इस संकट का प्रमुख समाधान मान रहे हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या ये कदम समय रहते उठाए जा सकेंगे, या फिर पानी की कमी लाखों किसानों की जिंदगी और आजीविका को निगल जाएगी?
जल संकट की यह कहानी सिर्फ बांग्लादेश की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक चेतावनी है कि अगर पानी बचाने के प्रयास अभी नहीं हुए, तो आने वाले समय में सबसे बड़ी लड़ाई जमीन नहीं, पानी के लिए होगी।
