संसद के बाहर शक्ति प्रदर्शन की तैयारी, राज्य का दर्जा मांगने दिल्ली कूच करेंगे उमर अब्दुल्ला
श्रीनगर/नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर की राजनीति एक बार फिर गर्माती नजर आ रही है। लंबे समय से राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग को लेकर चल रही चर्चा अब सड़कों से संसद तक पहुंचने वाली है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) ने बड़ा फैसला लेते हुए ऐलान किया है कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, उनके मंत्री, विधायक और सांसद संसद के मानसून सत्र के पहले दिन नई दिल्ली में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
बुधवार को श्रीनगर के पास दाचीगाम नेशनल पार्क में पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। दिलचस्प बात यह रही कि यह बैठक ऐसे इलाके में आयोजित की गई जहां मोबाइल नेटवर्क तक उपलब्ध नहीं था। बैठक में राज्य का दर्जा, अनुच्छेद 370, बेरोजगारी, आरक्षण नीति, नशाखोरी और विकास जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के बाद जारी बयान में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने स्पष्ट कहा कि पार्टी संसद के मानसून सत्र के पहले दिन दिल्ली में प्रदर्शन कर जम्मू-कश्मीर को तत्काल राज्य का दर्जा और संवैधानिक अधिकार बहाल करने की मांग उठाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला केवल विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि उमर अब्दुल्ला की नई राजनीतिक रणनीति का संकेत है। अक्टूबर 2024 में भारी जनादेश मिलने के बाद पार्टी पर अपने मूल राजनीतिक एजेंडे से दूर जाने के आरोप लग रहे थे। अब पार्टी नेतृत्व यह संदेश देना चाहता है कि वह अपने वादों और वैचारिक मुद्दों पर पीछे हटने को तैयार नहीं है।
इस बीच पार्टी के कुछ नेताओं ने खुलकर नाराजगी भी जताई है। श्रीनगर से सांसद आगा रुहुल्लाह पहले ही नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल उठा चुके हैं। ऐसे में आने वाला मानसून सत्र केवल संसद के लिए ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की राजनीति के लिए भी बेहद अहम माना जा रहा है।
अब सबकी नजरें दिल्ली पर टिकी हैं, जहां संसद के बाहर होने वाला यह प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर की राजनीति को नया मोड़ दे सकता है।
