June 30, 2026

विदेशी निवेशकों ने भारतीय बॉन्ड में लगाया रिकॉर्ड दांव

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जून 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय सरकारी बॉन्ड में रिकॉर्ड निवेश किया है। केवल इस महीने में ही उन्होंने लगभग 3 अरब डॉलर (करीब ₹25,000 करोड़ से अधिक) के सरकारी बॉन्ड खरीदे, जो अब तक का सबसे बड़ा मासिक निवेश माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की नई कर छूट और वैश्विक बॉन्ड इंडेक्स में भारत के शामिल होने की बढ़ती उम्मीदों ने विदेशी निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है।

सरकार ने हाल ही में विदेशी निवेशकों के लिए सरकारी बॉन्ड पर लगने वाला 12.5% दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ कर (Long-Term Capital Gains Tax) और 20% विदहोल्डिंग टैक्स समाप्त कर दिया है। इसके साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने Fully Accessible Route (FAR) के तहत लंबी अवधि वाले सरकारी बॉन्ड को भी शामिल कर दिया है। इन फैसलों से भारतीय बॉन्ड बाजार विदेशी निवेशकों के लिए पहले की तुलना में कहीं अधिक आकर्षक बन गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि इन सुधारों से भारत के जल्द ही Bloomberg Global Aggregate Bond Index में शामिल होने की संभावना और मजबूत हुई है। यदि ऐसा होता है, तो दुनिया भर के बड़े निवेश फंड स्वतः भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश बढ़ा सकते हैं, जिससे देश में विदेशी पूंजी का प्रवाह और तेज हो सकता है। साथ ही जून के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में आई करीब 20% गिरावट ने भी भारतीय अर्थव्यवस्था और बॉन्ड बाजार के प्रति निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है।

विदेशी निवेश केवल सरकारी बॉन्ड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि ट्रेजरी बिल्स में भी रिकॉर्ड खरीदारी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि सरकार और RBI इसी तरह निवेश-अनुकूल नीतियां जारी रखते हैं तथा वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल बनी रहती हैं, तो आने वाले महीनों में भारत के ऋण बाजार में विदेशी निवेश का नया रिकॉर्ड बन सकता है। इससे रुपये को मजबूती मिलने के साथ-साथ देश के विदेशी मुद्रा भंडार और वित्तीय स्थिरता को भी बड़ा सहारा मिल सकता है।

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