June 20, 2026

विकसित भारत की नींव बना जल मिशन, बदली करोड़ों जिंदगियां

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भारत में जल सुरक्षा को लेकर पिछले एक दशक में हुए बदलावों को केंद्र सरकार विकसित भारत के लक्ष्य की अहम आधारशिला मान रही है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने कहा है कि जल जीवन मिशन और स्वच्छ भारत मिशन जैसी पहलें केवल सरकारी योजनाएं नहीं, बल्कि देश के जल प्रबंधन मॉडल में एक बड़े परिवर्तन का प्रतीक हैं। उनका दावा है कि इन अभियानों ने पेयजल, स्वच्छता और जल संरक्षण को राष्ट्रीय प्राथमिकता के केंद्र में ला दिया है।

सरकार के अनुसार, जल जीवन मिशन शुरू होने के समय ग्रामीण भारत के केवल करीब 17 प्रतिशत घरों तक नल से जल पहुंचता था, जबकि अब यह आंकड़ा 81 प्रतिशत से अधिक हो चुका है। 15.8 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन मिलने से महिलाओं और बच्चों पर पानी लाने का बोझ कम हुआ है। इससे शिक्षा, रोजगार और अन्य उत्पादक गतिविधियों के लिए समय बढ़ा है, वहीं जलजनित बीमारियों पर होने वाला खर्च भी घटा है।

स्वच्छ भारत मिशन को भी इस बदलाव का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। सरकार का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में शौचालय निर्माण और स्वच्छता के प्रति जागरूकता ने न केवल खुले में शौच की समस्या कम की, बल्कि महिलाओं की गरिमा, सुरक्षा और स्वास्थ्य को भी मजबूत किया। इसके साथ ही वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और जल संरक्षण अभियानों के तहत देशभर में करोड़ों संरचनाएं विकसित की गई हैं, जिससे कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला है।

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के सामने जल संकट की चुनौती अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। दुनिया की लगभग 18 प्रतिशत आबादी वाले भारत के पास केवल 4 प्रतिशत मीठे जल संसाधन हैं। बढ़ता शहरीकरण, जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा भविष्य में दबाव बढ़ा सकते हैं। ऐसे में पेयजल, स्वच्छता, नदी संरक्षण, भूजल प्रबंधन और जल पुनर्चक्रण को एकीकृत दृष्टिकोण से आगे बढ़ाना ही देश की दीर्घकालिक जल सुरक्षा और सतत विकास की कुंजी माना जा रहा है।