June 19, 2026

UPSC की EWS सूची पर बड़ा सवाल, जांच में चौंकाने वाले नाम

The-UPSC-office-on-Delhis-Shahjahan-Road.-Tashi-Tobgyal

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कोटे के तहत चयनित उम्मीदवारों को लेकर नई बहस छिड़ गई है। एक मीडिया जांच में दावा किया गया है कि EWS श्रेणी में सफल हुए कई उम्मीदवार ऐसे परिवारों से आते हैं जिनकी पृष्ठभूमि अपेक्षाकृत संपन्न मानी जाती है। इनमें प्रतिष्ठित निजी स्कूलों के पूर्व छात्र, बड़े कारोबारियों के बेटे-बेटियां, IIT स्नातक और बहुराष्ट्रीय कंपनियों में कार्यरत पेशेवर भी शामिल बताए गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष EWS कोटे के तहत कुल 104 उम्मीदवारों का चयन हुआ। EWS आरक्षण का उद्देश्य उन सामान्य वर्ग के परिवारों को अवसर देना है जिनकी वार्षिक आय 8 लाख रुपये से कम है। हालांकि जांच में सामने आए कुछ प्रोफाइल्स ने इस व्यवस्था की प्रभावशीलता और पात्रता निर्धारण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आलोचकों का कहना है कि केवल आय सीमा के आधार पर आर्थिक कमजोरी तय करना वास्तविक सामाजिक-आर्थिक स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाता।

विशेषज्ञों का मानना है कि कई परिवारों के पास व्यवसाय, संपत्ति या अन्य संसाधन हो सकते हैं, लेकिन उनकी घोषित आय निर्धारित सीमा के भीतर होने के कारण वे EWS प्रमाणपत्र प्राप्त कर लेते हैं। इससे उन अभ्यर्थियों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं जो वास्तव में आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे हैं। दूसरी ओर, नियमों के समर्थकों का तर्क है कि जब तक उम्मीदवार सरकार द्वारा तय पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं, तब तक उनके चयन पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा।

इस खुलासे के बाद EWS आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और पात्रता मानकों को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग तेज हो सकती है। यह मामला केवल UPSC तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में शिक्षा और सरकारी नौकरियों में लागू EWS नीति की प्रभावशीलता पर व्यापक बहस को जन्म दे सकता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि सरकार और संबंधित संस्थाएं इन सवालों का जवाब किस तरह देती हैं।