भारत के ‘वॉटर वेपन’ से क्यों घबराया पाकिस्तान?
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की बदली जल नीति अब पाकिस्तान के लिए नई रणनीतिक चुनौती बनती दिख रही है। सिंधु जल संधि को निलंबित रखने के फैसले के बीच चिनाब नदी पर बने बगलिहार, सलाल और दुलहस्ती जलविद्युत परियोजनाओं को लेकर पाकिस्तान में चिंता बढ़ गई है। इन परियोजनाओं को भारत की बढ़ती जल प्रबंधन क्षमता और रणनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।
1960 की सिंधु जल संधि के तहत भारत को पूर्वी नदियों का पूर्ण उपयोग और पश्चिमी नदियों पर सीमित अधिकार मिले थे। लेकिन 2025 के आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को “इन एबेयंस” यानी निलंबित रखने का फैसला किया। इसके बाद पाकिस्तान लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी चिंता जता रहा है, जबकि भारत का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि है और आतंकवाद के साथ सामान्य संबंध संभव नहीं हैं।
रक्षा और सामरिक मामलों के जानकारों के अनुसार, मौजूदा स्थिति में जल संसाधन केवल विकास का माध्यम नहीं, बल्कि कूटनीतिक और रणनीतिक प्रभाव का भी महत्वपूर्ण साधन बन चुके हैं। भारत की जल अवसंरचना में बढ़ती क्षमता और बदली हुई नीति ने दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में पानी को एक अहम रणनीतिक मुद्दा बना दिया है, जिस पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
