‘आवर रिवर आवर फ्यूचर आवर कल्चर’ विषय पर कार्यशाला आयोजित
जमशेदपुर : रंभा कॉलेज और रंभा कॉलेज ऑफ एजुकेशन के तत्वावधान में ‘आवर रिवर आवर फ्यूचर आवर कल्चर’ विषय पर कार्यशाला का आयोजन हुआ. संस्थान के अध्यक्ष राम बचन ने ‘हमारी नदी, हमारी संस्कृति’ की भावना को पुनर्जीवित करने पर जोर देते हुए युवा पीढ़ी से नदियों के संरक्षण के लिए अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया. सचिव गौरव बचन ने अतिथियों का स्वागत दिया, जबकि प्राचार्या डॉ. कल्याणी कबीर ने कार्यशाला के विषय पर विस्तृत प्रकाश डाला. मुख्य अतिथि बीएचयू के सेवानिवृत्त प्रोफेसर डॉ. डी एन तिवारी ने कहा कि नदियों को बचाना, मानव सभ्यता को बचाने के समान है. हमारे गांव और शहर नदियों के किनारे ही विकसित हुए है. पर्यावरणविद् गौरव आनंद ने इस मुद्दे पर शैक्षणिक स्तर पर संवाद की आवश्यकता बताते हुए कहा कि ऐसे विमर्श समय की मांग है. वैज्ञानिक डॉ. विश्वजीत बेरा ने नदियों के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि भारत में नदियां केवल जल स्रोत नहीं, बल्कि संस्कृति और अध्यात्म का केंद्र है. समाजसेवी डॉ. कविता परमार ने जल संरक्षण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने पर बल दिया. कोल्हान विश्वविद्यालय की डॉ. सुचित्रा बेहरा एवं डॉ. मनोज कुमार ने भविष्य में जल संकट की गंभीरता की ओर ध्यान आकर्षित किया. इस अवसर पर प्रबुद्धजनों एवं शोधार्थियों के लेखों से युक्त स्मारिका पुस्तिका का विमोचन किया. कार्यक्रम का संचालन डॉ. सुमन लता एवं असिस्टेंट प्रोफेसर ऐश्वर्या कर्मकार ने किया, जबकि मुख्य बिंदुओं का विवरण डॉ. गंगा भोला ने प्रस्तुत किया. धन्यवाद ज्ञापन डॉ. किशन कुमार शर्मा ने किया. कार्यक्रम में संस्थान की अध्यक्ष रंभा देवी, सह सचिव विवेक बचन सहित सभी प्राध्यापक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे.