झारखंड के साहिबगंज की एक 23 वर्षीय आदिवासी युवती से जुड़े कथित मानव तस्करी और शोषण के मामले ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरुग्राम से रेस्क्यू की गई इस युवती के मामले में अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाते हुए हरियाणा और झारखंड प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
आरोप है कि युवती को साल 2021 में बेहतर कमाई और कुछ महीनों में घर लौटने का सपना दिखाकर दिल्ली लाया गया था। लेकिन इसके बाद उसकी जिंदगी मुश्किलों में घिर गई। शिकायत के मुताबिक उसे अलग-अलग जगहों पर घरेलू काम करवाया गया और आखिर में गुरुग्राम के सेक्टर-40 स्थित एक घर में दो वर्षों तक बिना वेतन काम करने के लिए मजबूर किया गया।
युवती ने आरोप लगाया है कि उसे घर से बाहर जाने या परिवार से संपर्क करने की अनुमति नहीं थी। लगातार काम कराने के बावजूद उसे एक भी रुपये वेतन नहीं मिला। उसने करीब 1.92 लाख रुपये बकाया मजदूरी का दावा किया है। शिकायत में यह भी कहा गया कि कथित तौर पर उसकी तनख्वाह एजेंटों के खाते में भेजी जाती रही, लेकिन उसके हाथ कुछ नहीं आया।
मामले ने नया मोड़ तब लिया जब युवती ने छिपकर अपने भाई से संपर्क किया। परिवार की पहल और एक सामाजिक संस्था की मदद से NHRC के निर्देश पर संयुक्त टीम ने 22 मई को गुरुग्राम से उसका रेस्क्यू किया।
अब NHRC ने गुरुग्राम पुलिस, हरियाणा श्रम विभाग और झारखंड प्रशासन को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट देने को कहा है। आयोग ने माना है कि शुरुआती तौर पर मामला मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़ा प्रतीत होता है।
चौंकाने वाली बात यह है कि युवती के गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक मानव तस्करी, अवैध बंधन और वेतन न देने के मामले में FIR दर्ज नहीं हुई है। ऐसे में यह मामला सिर्फ एक रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि मानव तस्करी और श्रमिक शोषण के खिलाफ व्यवस्था की जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल बनकर सामने आया है।