May 27, 2026

लद्दाख पर सोनम वांगचुक के बयान से गरमाई सियासत, LG वीके सक्सेना ने दी सख्त चेतावनी

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लेह/नई दिल्ली: प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और शिक्षा सुधारक Sonam Wangchuk एक बार फिर अपने बयानों को लेकर राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। लद्दाख की स्थिति की तुलना मणिपुर से करने वाले उनके बयान पर अब लद्दाख के उपराज्यपाल Vinai Kumar Saxena ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इस पूरे घटनाक्रम ने लद्दाख की राजनीति और केंद्र सरकार के साथ चल रही बातचीत को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में हुई एक मुलाकात के दौरान एलजी वीके सक्सेना ने सोनम वांगचुक को “उत्तेजक और भ्रामक नैरेटिव” से बचने की सलाह दी। एलजी ने कहा कि लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का मतलब झूठ फैलाना या माहौल बिगाड़ना नहीं होना चाहिए।

दरअसल, कुछ दिनों पहले सोनम वांगचुक ने एक इंटरव्यू में कहा था कि उन्हें डर था कि लद्दाख “दूसरा मणिपुर” बन सकता है। उनका इशारा पिछले साल लद्दाख में हुए तनाव और हिंसक घटनाओं की ओर था। हालांकि बाद में एलजी ने दावा किया कि वांगचुक ने स्वीकार किया कि मणिपुर से तुलना करना “गलत आकलन” था।

इस मुलाकात में वांगचुक की पत्नी गीताांजलि आंगमो भी मौजूद थीं। दोनों पक्षों के बीच लद्दाख में विकास, राजनीतिक संवाद और शांति बनाए रखने को लेकर चर्चा हुई। एलजी ने यह भी कहा कि लगातार विरोध प्रदर्शन और रैलियां लद्दाख के पर्यटन उद्योग को नुकसान पहुंचा सकती हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।

सोनम वांगचुक लंबे समय से लद्दाख को संवैधानिक सुरक्षा, राज्य का दर्जा और स्थानीय लोगों के अधिकारों की मांग को लेकर सक्रिय रहे हैं। हाल के महीनों में उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ कई आंदोलन और अभियान भी चलाए थे। उनकी छवि एक पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में काफी मजबूत मानी जाती है, खासकर युवाओं के बीच।

इस पूरे विवाद के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कुछ लोग वांगचुक के बयानों को जनता की चिंता बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे माहौल खराब करने वाला बयान मान रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि लद्दाख में चल रही संवैधानिक और राजनीतिक मांगों के बीच यह विवाद आने वाले समय में और बड़ा मुद्दा बन सकता है।

फिलहाल केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन सोनम वांगचुक और एलजी के बीच सामने आई यह तनातनी अब राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन चुकी है।