June 14, 2026

‘राज्यसभा सीट की चोरी हुई!’ कांग्रेस का बड़ा आरोप, अब अदालत से सड़क तक लड़ाई की तैयारी

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मीनाक्षी नटराजन का नामांकन खारिज होने पर गरमाई राजनीति, राहुल-खड़गे की बैठक में बना देशव्यापी आंदोलन का प्लान

नई दिल्ली। मध्य प्रदेश की राज्यसभा सीट को लेकर सियासी घमासान अब और तेज होने जा रहा है। कांग्रेस ने अपनी वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन खारिज किए जाने को लोकतंत्र पर हमला बताते हुए कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर लड़ाई लड़ने का ऐलान कर दिया है।

कांग्रेस का आरोप है कि यह सिर्फ एक नामांकन रद्द होने का मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश है। पार्टी ने इसे “सीट चोरी” करार देते हुए भाजपा और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

राहुल-खड़गे की बैठक में बना बड़ा प्लान

गुरुवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की अध्यक्षता में हुई शीर्ष नेताओं की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, के.सी. वेणुगोपाल, जयराम रमेश, भूपेश बघेल और कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

बैठक के बाद पार्टी ने साफ संकेत दिए कि वह केवल अदालत का दरवाजा ही नहीं खटखटाएगी, बल्कि जनता के बीच भी इस मुद्दे को लेकर अभियान चलाएगी।

क्या है पूरा विवाद?

मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उम्मीदवार बनाया था। लेकिन उनका नामांकन खारिज हो गया, जिसके बाद भाजपा के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए।

कांग्रेस का दावा है कि नामांकन खारिज करने की प्रक्रिया में गंभीर सवाल हैं और पार्टी इस फैसले को कानूनी रूप से चुनौती देगी। वहीं भाजपा इस पूरे मामले को नियमों के अनुसार हुई कार्रवाई बता रही है।

सिर्फ राज्यसभा नहीं, कई मुद्दों पर आंदोलन की तैयारी

कांग्रेस इस विवाद को अकेले नहीं लड़ना चाहती। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में महंगाई, बेरोजगारी, NEET परीक्षा विवाद, विभिन्न पेपर लीक मामलों और CBSE ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद जैसे मुद्दों को भी जनता के बीच प्रमुखता से उठाया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, जून के अंत तक देशभर में चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन और जनसंपर्क अभियान शुरू किए जा सकते हैं। पार्टी का मानना है कि युवाओं और मध्यम वर्ग से जुड़े ये मुद्दे जनता के बीच व्यापक असर डाल सकते हैं।

2027 और 2029 की राजनीति की झलक?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस पूरे घटनाक्रम को केवल एक राज्यसभा सीट तक सीमित नहीं रखना चाहती। पार्टी इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता के बड़े सवाल के रूप में पेश करने की कोशिश कर रही है।दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि कांग्रेस अपनी राजनीतिक असफलताओं को छिपाने के लिए बेवजह विवाद खड़ा कर रही है।

आगे क्या होगा?

अब नजर अदालत की संभावित सुनवाई और कांग्रेस के प्रस्तावित देशव्यापी आंदोलन पर रहेगी। यदि यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर जोर पकड़ता है, तो आने वाले महीनों में यह सत्ता और विपक्ष के बीच एक बड़ा राजनीतिक संघर्ष बन सकता है।फिलहाल इतना तय है कि मध्य प्रदेश की एक राज्यसभा सीट ने दिल्ली की राजनीति का तापमान अचानक बढ़ा दिया है, और इसकी गूंज संसद से लेकर सड़कों तक सुनाई दे सकती है।

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