मुंबई में इस साल बकरीद से पहले कुर्बानी को लेकर नया विवाद सामने आया है। शहर की कुछ हाउसिंग सोसायटियों में कुर्बानी की अनुमति को लेकर शुरू हुई बहस अब प्रशासनिक फैसले तक पहुंच गई है। विरोध और शिकायतों के बाद BMC ने पहले जारी की गई अनुमति वापस ले ली, जिससे कई मुस्लिम परिवारों में नाराजगी देखने को मिल रही है।
मामला दिंडोशी और घाटकोपर की कुछ हाउसिंग सोसायटियों से जुड़ा है, जहां मुस्लिम निवासी वर्षों से तय नियमों और अनुमति के साथ बकरीद पर कुर्बानी करते आए हैं। लेकिन इस बार कुछ हिंदू और जैन निवासियों ने इसका विरोध किया। उनका कहना है कि सोसायटी परिसर में कुर्बानी से स्वच्छता, स्वास्थ्य और धार्मिक भावनाओं पर असर पड़ सकता है।
विरोध बढ़ने के बाद मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया। शिकायतों के बाद BMC ने पहले से दी गई परमिशन रद्द कर दी और संबंधित सोसायटियों में रखे गए बकरों को परिसर से हटाने के निर्देश भी जारी किए गए।
दूसरी ओर, मुस्लिम निवासियों का कहना है कि यह परंपरा नई नहीं है और वे हर साल कानूनी अनुमति के साथ त्योहार मनाते रहे हैं। उनका सवाल है कि यदि पहले अनुमति दी गई थी, तो अचानक उसे वापस क्यों लिया गया?
अब यह मुद्दा सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि साझा समाज, सह-अस्तित्व और नियमों की समान व्याख्या पर भी चर्चा का विषय बनता जा रहा है। बकरीद से पहले उठे इस विवाद ने मुंबई की सोसायटी संस्कृति और सामुदायिक संतुलन पर नई बहस छेड़ दी है।