Jharkhand Bhawan Navi Mumbai : नवी मुंबई में होगा अपना ‘झारखंड भवन’, वाशी में मिली जमीन, जल्द शुरू होगा निर्माण
Jharkhand Bhawan Navi Mumbai
Ranchi : झारखंड सरकार के लिए मुंबई में अपना राजकीय भवन (झारखंड भवन) बनाने का वर्षों पुराना सपना अब हकीकत में बदलने जा रहा है। नवी मुंबई के पॉश इलाके वाशी में झारखंड भवन निर्माण का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है। राज्य सरकार को यहाँ 63.65 डिसमिल जमीन आवंटित कर दी गई है। जमीन मिलने के साथ ही अब भवन निर्माण की प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना है।
दो वर्षों का इंतजार खत्म, बढ़ सकती है निर्माण लागत
उल्लेखनीय है कि साल 2024 में इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए 136 करोड़ रुपये का प्रारंभिक बजट प्रस्तावित किया गया था। प्रशासनिक और तकनीकी कारणों से यह प्रस्ताव पिछले लगभग दो वर्षों से लंबित पड़ा था। हालांकि, अब जब जमीन का आधिकारिक आवंटन हो चुका है, तो विशेषज्ञों का मानना है कि समय बीतने के साथ निर्माण सामग्री और श्रम लागत में हुई वृद्धि के कारण भवन की कुल लागत में इजाफा हो सकता है।
सात मंजिला इमारत में होंगी आधुनिक सुख-सुविधाएं
प्रस्तावित झारखंड भवन न केवल स्थापत्य कला का नमूना होगा, बल्कि यह आधुनिक सुविधाओं से भी लैस होगा। भवन का ढांचा बेसमेंट, ग्राउंड फ्लोर और सात मंजिलों का होगा।
भवन की प्रमुख विशेषताएं:
- पार्किंग व्यवस्था: बेसमेंट में पार्किंग के लिए पर्याप्त जगह होगी, जहाँ 27 कारें और 137 बाइक खड़ी की जा सकेंगी।
- सुविधाएं: ग्राउंड फ्लोर पर एक विशाल डाइनिंग हॉल, आधुनिक पैंट्री व किचन, जिम, लॉकर रूम और वीआईपी वेटिंग लाउंज की सुविधा मिलेगी।
- सेमिनार और प्रदर्शनी: पहले तल्ले पर वीआईपी लाउंज के साथ-साथ सेमिनार हॉल और एग्जीबिशन हॉल (प्रदर्शनी कक्ष) का निर्माण होगा।
प्रशासनिक ब्लॉक: दूसरे तल्ले पर रेसिडेंट सेक्रेटरी का चेंबर, मीटिंग रूम और वेटिंग लाउंज स्थित होंगे। डॉरमेट्री सुविधा: तीसरे तल्ले पर 10 डॉरमेट्री बनाई जाएंगी, जिनमें कुल 57 बेड की व्यवस्था होगी।
राज्यपाल और मुख्यमंत्री समेत आम जनों को मिलेगी राहत
नवी मुंबई में इस भवन के बन जाने से झारखंड के राज्यपाल, मुख्यमंत्री, मंत्रीगण और अन्य अति विशिष्ट अतिथियों (VVIPs) के प्रवास के लिए एक सुरक्षित और उच्च स्तरीय ठिकाना उपलब्ध होगा। इसके अलावा, राज्य से इलाज या अन्य कार्यों के लिए मुंबई जाने वाले आम लोगों और अधिकारियों के लिए भी उचित दर पर ठहरने की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेगी। वर्तमान में मुंबई जैसे महंगे शहर में राजकीय अतिथियों के लिए ठहरने का अपना स्थायी परिसर न होने से सरकार को निजी व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ता था।

