Bokaro Missing Girl Case : हाई कोर्ट की DGP को कड़ी फटकार, पूछा- “क्या DNA टेस्ट के लिए भी अदालत के आदेश का इंतजार था?”
Bokaro Missing Girl Case
Ranchi : झारखंड के बोकारो से लापता 18 वर्षीय युवती के मामले में बुधवार को झारखंड उच्च न्यायालय ने पुलिसिया कार्यशैली पर तीखी नाराजगी जताई। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP), बोकारो एसपी, एफएसएल डायरेक्टर और नई एसआईटी (SIT) टीम को गुरुवार को सभी दस्तावेजों के साथ सशरीर तलब किया है। न्यायमूर्ति सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि यदि एसआईटी की जांच में लापरवाही की पुष्टि होती है, तो अदालत इस मामले को सीबीआई (CBI) को सौंपने में संकोच नहीं करेगी।
3 घंटे का काम 4 दिन में भी अधूरा क्यों : उच्च न्यायालय
सुनवाई के दौरान वर्चुअल माध्यम से हाजिर हुईं डीजीपी से कोर्ट ने सीधा सवाल किया कि बरामद नरकंकाल का अब तक डीएनए टेस्ट क्यों नहीं कराया गया। अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि नरकंकाल बरामद हुए तीन से चार दिन बीत चुके हैं। क्या पुलिस हर कदम के लिए अदालत के आदेश की प्रतीक्षा करती है? युवती के माता-पिता का सैंपल और कंकाल का सैंपल लेकर मात्र तीन-चार घंटे में जांच का परिणाम आ सकता था, फिर इस मामले को क्यों लटकाया जा रहा है? अदालत ने यह भी पूछा कि क्या अब तक माता-पिता के सैंपल लिए गए हैं, जिस पर सरकारी पक्ष कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका।
“यह कंकाल युवती का नहीं है”: प्रार्थी के वकील का दावा
प्रार्थी की ओर से पक्ष रख रहे अधिवक्ता विनसेंट रोहित मार्की और शांतनु गुप्ता ने अदालत को बताया कि बरामद किया गया कंकाल उस लापता युवती का नहीं है। वहीं, सरकार की ओर से दलील दी गई कि कंकाल का पोस्टमार्टम और एफएसएल (FSL) जांच कराई जाएगी। सरकार ने कोर्ट को यह भी सूचित किया कि इस मामले के मुख्य आरोपित दिनेश महतो को गिरफ्तार कर लिया गया है और लापता युवती का कंकाल बोकारो के घने जंगलों से बरामद हुआ है।
28 पुलिसकर्मियों का निलंबन और मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला बोकारो के पिंडराजोड़ा थाना (कांड संख्या 147/2025) से जुड़ा है। युवती 31 जुलाई 2025 से लापता थी। मामले में लापरवाही बरतने और पीड़ित परिवार के साथ दुर्व्यवहार के आरोप में बोकारो एसपी ने हाल ही में थाना प्रभारी सहित 28 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है। युवती की मां ने अपनी बेटी की तलाश के लिए हाई कोर्ट में ‘हेवियस कॉपस’ (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका दायर की थी।
कल का दिन महत्वपूर्ण: सभी अधिकारियों की पेशी
अदालत ने डीजीपी और पुलिस प्रशासन के ढुलमुल रवैये पर सख्त रुख अख्तियार करते हुए कल यानी गुरुवार को राज्य के शीर्ष पुलिस अधिकारियों और एफएसएल प्रमुख को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया है। कोर्ट ने साफ कर दिया है कि वह इस मामले में किसी भी स्तर की कोताही बर्दाश्त नहीं करेगा और सच सामने लाने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी की मदद लेने से भी पीछे नहीं हटेगा।

