Chaibasa Jhinkpani News : ‘हर घर जल’ योजना का नलकूप 4 महीने से ठप, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण, भाजपा जिलाध्यक्ष ने की मरम्मत की मांग
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Chaibasa : पश्चिमी सिंहभूम जिले के झींकपानी प्रखंड अंतर्गत ग्राम कैलेंडे के कुम्हार टोला में विकास के दावे जमीन पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। पिछले चार महीनों से गांव का एकमात्र नलकूप खराब पड़ा है, जिससे यहाँ भीषण पेयजल संकट खड़ा हो गया है। सरकारी तंत्र की अनदेखी से नाराज ग्रामीणों ने शुक्रवार को बैनर-पोस्टर के साथ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।
शोपीस बना ‘हर घर जल’ योजना का नलकूप
हैरानी की बात यह है कि केंद्र सरकार की ‘हर घर जल’ योजना के तहत स्थापित यह नलकूप पिछले काफी समय से बंद पड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि मरम्मत के अभाव में यह अब केवल एक शोपीस बनकर रह गया है। पेयजल संकट के कारण बस्ती की महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को चिलचिलाती धूप में लंबी दूरी तय कर पानी ढोना पड़ रहा है, जिससे उनका दैनिक जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
‘बस्ती चलो अभियान’ में गूंजी पानी की समस्या
शुक्रवार को भाजपा के ‘बस्ती चलो अभियान’ के तहत क्षेत्र का दौरा करने पहुंचीं भाजपा जिला अध्यक्ष गीता बालमुचू को ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा सुनाई। मौके पर मौजूद महिलाओं ने बताया कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी नलकूप ठीक नहीं कराया गया है। समस्या की गंभीरता को देखते हुए गीता बालमुचू ने तुरंत संबंधित विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया और नलकूप की अविलंब मरम्मत कराने का निर्देश दिया। इस दौरान उनके साथ झींकपानी मंडल अध्यक्ष दिलीप महतो और मंडल महामंत्री वरुण सवैया भी मुख्य रूप से उपस्थित थे।
इन ग्रामीणों ने उठाई आवाज
विरोध प्रदर्शन में कुम्हार टोला के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इनमें मुख्य रूप से दिलीप कुम्हार, विनोद कुम्हार, कमला देवी, शंकरी देवी, पार्वती देवी, ललिता देवी, रवीना देवी, पुष्पा कुमारी सहित अन्य ग्रामीण शामिल थे। ग्रामीणों ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि जल्द ही जलापूर्ति बहाल नहीं की गई, तो वे उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।
प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की उम्मीद
ग्रामीणों ने स्थानीय प्रशासन और पीएचइडी (PHED) विभाग से मांग की है कि कागजी योजनाओं से इतर धरातल पर समस्याओं का समाधान किया जाए। झींकपानी के इस सुदूर टोले में पानी की किल्लत अब एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या का रूप ले रही है, क्योंकि कई लोग विवश होकर असुरक्षित जल स्रोतों का उपयोग कर रहे हैं। अब देखना यह है कि राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद विभाग कितनी तत्परता से इस नलकूप को चालू करता है।

