विदेशी फंड पर सख्ती, NGO नियमों में बड़ा बदलाव
विदेशी फंडिंग प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों (NGO) के लिए केंद्र सरकार ने नियमों में बड़ा बदलाव किया है। गृह मंत्रालय द्वारा अधिसूचित नए संशोधनों के तहत अब संस्थाओं को विदेशी धन प्राप्त करने के लिए अपने कार्यों का स्पष्ट उद्देश्य और संचालन क्षेत्र बताना होगा। सरकार का कहना है कि इन बदलावों का मकसद विदेशी फंड के उपयोग में पारदर्शिता बढ़ाना और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
सरकार ने पहले से पंजीकृत संस्थाओं को एक वर्ष के भीतर अपने उद्देश्यों और कार्यक्षेत्र की जानकारी अपडेट करने का निर्देश दिया है। इसके अलावा यदि कोई संस्था अतिरिक्त राज्य या नया उद्देश्य जोड़ना चाहती है, तो उसे अतिरिक्त शुल्क देना होगा। सोशल मीडिया खातों की जानकारी देना भी अब अनिवार्य कर दिया गया है, जबकि विदेशी धन के वास्तविक स्रोत का खुलासा करना होगा, चाहे राशि किसी मध्यस्थ माध्यम से ही क्यों न आई हो।
नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि लाइसेंस बनाए रखने के लिए संस्थाओं को पिछले दो वित्तीय वर्षों में कम से कम 10 लाख रुपये की विदेशी सहायता अपने घोषित उद्देश्यों पर खर्च करनी होगी। वहीं, किस्तों में मिलने वाली विदेशी सहायता की अगली राशि तभी जारी होगी, जब पिछली किस्त का कम से कम 75 प्रतिशत उपयोग हो चुका हो। सरकार जरूरत पड़ने पर फील्ड जांच भी करेगी। माना जा रहा है कि ये बदलाव विदेशी फंडिंग के पूरे ढांचे को अधिक पारदर्शी, नियंत्रित और जवाबदेह बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
