April 15, 2026

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भारत की आत्मनिर्भरता: ‘AI for All’ मिशन के साथ वैश्विक हब बनने की ओर अग्रसर देश

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भारत की आत्मनिर्भरता

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में भारत की आत्मनिर्भरता

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के युग में भारत ने अपनी आत्मनिर्भरता और तकनीकी संप्रभुता सुनिश्चित करने के लिए ‘India AI मिशन’ के माध्यम से एक निर्णायक कदम उठाया है। वर्ष 2018 में नीति आयोग द्वारा प्रस्तुत “आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फॉर ऑल” (#AIforAll) की परिकल्पना के साथ, भारत एक ऐसा नेशनल मिशन संचालित कर रहा है जो न केवल आर्थिक विकास बल्कि सामाजिक समावेश को भी केंद्र में रखता है। भारत ने एक व्यापक ‘AI ईको-सिस्टम’ विकसित किया है, जो देश के हर क्षेत्र में कार्य करने के लिए तैयार है।

‘AI for All’ के छह मुख्य स्तंभ और राष्ट्रीय रणनीति


भारत सरकार की राष्ट्रीय रणनीति यह सुनिश्चित करती है कि AI केवल मात्र आर्थिक प्रगति का जरिया न बने, बल्कि यह सामाजिक सुधार और देश के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाने का माध्यम बने। इस मिशन के छह प्रमुख बिंदु (Pillars) निम्नलिखित हैं:

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  • आर्थिक प्रगति और $500 बिलियन का लक्ष्य: यह प्रोजेक्ट भारतीय अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों में AI के प्रयोग को अनिवार्य बनाता है।
  • India AI कंप्यूटर: इसके तहत हार्डवेयर से संबंधित इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है, ताकि उच्च स्तरीय गणना क्षमता देश के भीतर ही उपलब्ध हो।
  • India AI फ्यूचर स्किल्स: इसके माध्यम से टियर-2 और टियर-3 शहरों में डेटा AI लैब्स स्थापित की जा रही हैं, ताकि कौशल विकास का दायरा विस्तृत हो सके।
  • स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग और इनोवेशन: AI के क्षेत्र में नए स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही, ‘इंडिया AI सेंटर फॉर इनोवेशन’ लार्ज लैंग्वेज मॉडल्स (LLM) और नवीनतम AI ट्रेनिंग टूल्स पर काम कर रहा है।
  • India AI डेटा सेट प्लेटफॉर्म (AI Kosh): भारत अपना स्वयं का ‘AI कोष’ विकसित कर रहा है, जिसमें एक हजार मशीन लर्निंग डेटा सेट्स शामिल होंगे।
  • डिजिटल और कम्प्यूटेशनल इंफ्रास्ट्रक्चर: भारत नेट (BharatNet) मिशन के जरिए छह लाख गाँवों को ब्रॉडबैंड से जोड़कर सुदूर क्षेत्रों तक AI का लाभ पहुँचाने का निर्णय लिया गया है।

आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रमुख सरकारी पहल


सरकार ने ‘परम सिद्धि’ AI के माध्यम से हाई-पावर कंप्यूटिंग विकसित करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, आईटी मंत्रालय ‘मेघराज’ नाम से अपना क्लाउड प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है, ताकि डेटा के लिए विदेशी निर्भरता समाप्त हो सके। ‘नेशनल डेटा एनालिटिक्स प्लेटफॉर्म’ डेटा को ‘इंटरऑपरेबल’ और ‘मशीन रीडेबल’ प्रारूप में सुलभ कराता है, जबकि ‘इंडिया अर्बन डेटा एक्सचेंज’ स्मार्ट सिटीज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। टैलेंट और स्किल डेवलपमेंट के लिए SWAYAM और NPTEL जैसे पोर्टल्स के माध्यम से मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग के शॉर्ट-टर्म और लॉन्ग-टर्म कोर्सेज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि में AI का क्रांतिकारी प्रभाव


सरकार ने शासन के लगभग सभी आयामों (Dimensions) में AI के माध्यम से नागरिक सुविधाओं को बेहतर बनाया है:

  • स्वास्थ्य: ‘आरोग्य सेतु’ ऐप और ‘ई-संजीवनी’ टेली-मेडिसिन पोर्टल के जरिए सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की पहुँच सुनिश्चित की गई है।
  • भाषा की विषमता: ‘भाषिनी (Bhasini)’ प्रोजेक्ट के जरिए भाषा की बाधाओं को दूर किया जा रहा है। इसमें उपलब्ध बेंचमार्क API एक भाषा से दूसरी भाषा में अनुवाद को बेहद सुलभ बनाते हैं।
  • कृषि: AI आधारित ‘किसान ड्रोन्स’ और विशेष ऐप्स के जरिए किसानों को मौसम, मिट्टी और फसलों से संबंधित सटीक सलाह दी जा रही है।
  • शिक्षा: ‘दीक्षा (DEEKSHA)’ प्लेटफॉर्म AI के सहयोग से छात्रों को ‘पर्सनलाइज्ड लर्निंग’ का अनुभव प्रदान कर रहा है।
  • बैंकिंग: आरबीआई ने वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने और नागरिकों को जागरूक करने के लिए AI आधारित चैटबॉट्स और सुरक्षा तंत्र विकसित किए हैं।
  • इंडस्ट्री: ‘नेशनल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी मिशन’ के तहत AI संचालित रोबोटिक्स और ऑटोमेशन पर तेजी से कार्य हो रहा है।

लीगल फ्रेमवर्क और उत्तरदायी AI (Responsible AI)


भारत ने AI को कानून के दायरे में लाने और डेटा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक सुदृढ़ कानूनी ढांचा तैयार किया है। इसमें ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023’ एक मील का पत्थर है, जो डेटा के उपयोग की सीमाएं परिभाषित करता है। उदाहरण के तौर पर, कोई हेल्थकेयर ऐप मरीज के डेटा का उपयोग विज्ञापन के लिए नहीं कर सकता। इसके अतिरिक्त, ‘इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट’ के साइबर कानून विभिन्न डिजिटल क्षेत्रों को विनियमित करते हैं। नीति आयोग के ‘रिस्पॉन्सिबल AI प्रिंसिपल्स 2021’ ने AI में निष्पक्षता (Fairness), जवाबदेही (Accountability) और पारदर्शिता (Transparency) को अनिवार्य बनाया है। आईटी मंत्रालय के विस्तृत निर्देश यह सुनिश्चित करते हैं कि AI का उपयोग मानव गरिमा और अधिकारों के साथ संतुलित रहे।

  • डॉ.. इला कुमार
    कुलपति, जमशेदपुर महिला विश्वविद्यालय
    (लेखिका AI की विशेषज्ञ भी हैं)

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