Kolkata/West Bengal : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के मुहाने पर खड़े कोलकाता में शनिवार को भारी सियासी बवाल देखने को मिला। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मेगा रैली शुरू होने से महज आधा घंटा पहले मध्य कोलकाता रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। ‘ब्रिगेड परेड मैदान’ की ओर जा रहे भाजपा समर्थकों और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हुई। इस दौरान पत्थरबाजी और नारेबाजी से स्थिति इतनी बिगड़ गई कि एक थाना प्रभारी और भाजपा के जिला अध्यक्ष समेत कई लोग लहूलुहान हो गए।
मंत्री शशि पांजा के घर पर हमले का आरोप
तनाव के बीच एक चौंकाने वाला आरोप सामने आया कि गिरीश पार्क इलाके में स्थित पश्चिम बंगाल की मंत्री शशि पांजा के आवास को निशाना बनाया गया है। टीएमसी का दावा है कि रैली में जा रहे भाजपा समर्थकों ने मंत्री के घर पर ईंट-पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी, जिससे खिड़कियों के शीशे टूट गए। मंत्री शशि पांजा ने आरोप लगाया कि भाजपा कार्यकर्ता बसों में बम और बोतलें लेकर जा रहे थे। उन्होंने दावा किया कि विवाद तब शुरू हुआ जब भाजपा समर्थकों ने इलाके में लगे ‘भाजपा का बहिष्कार करो’ के पोस्टर फाड़ दिए।
भाजपा का पलटवार- बिना उकसावे के हुआ हमला
दूसरी ओर, भाजपा ने टीएमसी के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए खुद को पीड़ित बताया है। भाजपा नेताओं का कहना है कि जब उनके कार्यकर्ता शांतिपूर्ण तरीके से ‘परिवर्तन यात्रा’ के समापन समारोह और प्रधानमंत्री की रैली में शामिल होने जा रहे थे, तब टीएमसी के गुंडों ने उन पर हमला किया। भाजपा के उत्तरी कोलकाता जिला अध्यक्ष तमघनो घोष इस झड़प में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। भाजपा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि उनकी बसों पर सुनियोजित तरीके से पथराव किया गया और कई वाहन क्षतिग्रस्त कर दिए गए।
बीच-बचाव में बोबाजार थाना प्रभारी जख्मी
हिंसा की सूचना मिलते ही स्थिति संभालने पहुंची पुलिस को भी उपद्रवियों के गुस्से का सामना करना पड़ा। दोनों गुटों को तितर-बितर करने के प्रयास में बोबाजार पुलिस थाना प्रभारी बप्पादित्य नस्कर चोटिल हो गए। स्थिति बेकाबू होते देख अतिरिक्त पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया। फिलहाल इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है, जिसके बाद स्थिति नियंत्रण में है। झड़प के कारण दहशत में आए स्थानीय दुकानदारों ने अपने शटर गिरा दिए।
राजनीतिक ध्रुवीकरण चरम पर
यह झड़प रैली स्थल से लगभग पांच किलोमीटर दूर हुई, लेकिन इसकी गूंज पूरे राज्य में सुनाई दे रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री की रैली से ठीक पहले हुई यह हिंसा बंगाल में बढ़ते राजनीतिक ध्रुवीकरण और चुनाव से पहले दोनों पार्टियों के बीच चरम पर पहुँचे तनाव का नतीजा है। जहाँ भाजपा इसे सत्ता विरोधी लहर को दबाने की कोशिश बता रही है, वहीं टीएमसी इसे भाजपा द्वारा फैलाई गई अशांति करार दे रही है।